गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में अदालत ने भी टिप्पणी की। दोषी अनिल उर्फ नीलू की सजा पर फैसला सुनाने से पहले अदालत ने पूरे घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश के लिए चार जुलाई 2017 का दिन शर्मसार करने वाला है। जिला की एक मासूम नाबालिग स्कूली छात्रा के साथ हुई इस दरिंदगी की घटना ने छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा किया है। वहीं इस आपराधिक घटना में संदिग्ध की पुलिस हिरासत में मौत ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया था।
प्रदेश पुलिस की साख को तार-तार कर गया गुडि़या प्रकरण
जिला शिमला में गुडि़या दुष्कर्म और हत्या मामले ने प्रदेश पुलिस की साख को तार तार कर रख दिया था। मामले की जांच सबसे पहले प्रदेश पुलिस ने ही संभाली थी।छानबीन के दौरान पुलिस ने छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों से एक नेपाली मूल के सूरज की हिरासत में मौत हो गई थी। सूरज की हिरासत में मौत की घटना ने पुलिस के आईजी सहित तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शिमला डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी ठियोग मनोज जोशी के साथ छह पुलिस कर्मियों को हवालात पहुंचा दिया।
इन सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर निलंबन की गाज भी गिरी। इनमें से एक एसआईटी के हेड रहे आईजी जहूर एच जैदी अभी भी हवालात में हैं, जमानत के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। यह प्रदेश के इतिहास में शायद पहली घटना हो जिसमें पुलिस की इतनी फजीहत हुई। पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा इस कदर भड़का था कि गुस्साई भीड़ ने कोटखाई थाना तक जला दिया था। हिरासत में आरोपी की मौत का मामला अभी भी सीबीआई कोर्ट चंडीगढ़ में विचाराधीन है।