फोरलेन का निर्माण पुराने सर्वे के अनुसार करें कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। फोरलेन ट्विन टनल प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति में शामिल शांति विहार और भट्ठाकुफर के भवन मालिकों की मंगलवार को शांति विहार सामुदायिक भवन में बैठक हुई। इसमें मौजूद 80 से अधिक भवन मालिकों ने प्रशासन और एनएचएआई को चेताया कि उन्हें मशीनों से भी ट्विन टनल का निर्माण मंजूर नहीं है। फोरलेन का निर्माण पुराने सर्वे के अनुसार ही करें।
टनल का निर्माण भट्ठाकुफर से चलौंठी तक हो रहा है। इसके ऊपर शांति विहार और संजौली क्षेत्र हैं। भवन मालिकों ने कहा कि समानांतर दो टनल का निर्माण भविष्य में विनाश का कारण बन सकता है। इनकी वर्षों की जमापूंजी से बने 500 मकानों पर खतरा पैदा होगा। इसलिए टनल के बजाय पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन का निर्माण किया जाए। बैठक में समिति की कार्यकारिणी के सदस्य एवं शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और भट्ठाकुफर के पार्षद नरेंद्र ठाकुर सहित राजेंद्र चौहान, रमेश चौहान, सतीश शर्मा, राजेंद्र जस्टा, डॉ. बलदेव चौहान, कामेश्वर गुप्ता, ओपी कपरेट, कृष्णा धांटा और अन्य भवन मालिकों ने कहा कि एनएचएआई ने अब मान लिया है कि टनल निर्माण में ब्लास्टिंग नहीं होगी। इससे जाहिर होता है कि अब तक बनी टनल के निर्माण के दौरान भूमिगत ब्लास्टिंग की गई है। मकानों में आई दरारों का यही मुख्य कारण है।
उन्होंने कहा कि एनएचएआई ने फोरलेन निर्माण के लिए पहले जो सर्वे किया था उसके तहत 12 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने के बाद कई परिवारों को विस्थापित किया था। सरकारी भवन भी गिराए थे। लोगों ने बताया कि पुराने सर्वे के मुताबिक फोरलेन का निर्माण भट्ठाकुफर के पास से होना था तथा इसमें टनल का जिक्र नहीं था। बाद में इसमें बदलाव कर भट्ठाकुफर से चलौंठी तक टनल बनाने का काम शुरू कर दिया। इससे क्षेत्र के सैकड़ों भवन मालिकों और किराये पर रहने वाले लोगों की नींद उड़ चुकी है। लोगों ने कहा कि टनल निर्माण जनहित में नहीं है। उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्य पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किया जाए और इसमें किसी भी प्रकार का जोखिम न लें।
अब भूमि उपयोग में बदलाव क्यों किया
पुराने सर्वे में अधिग्रहीत भूमि पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है।भवन मालिकों ने सवाल उठाया कि जब भूमि का अधिग्रहण फोरलेन निर्माण के लिए किया था तो अब भूमि उपयोग में बदलाव कैसे किया गया? इस भूमि पर कार्यालय का निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है? उन्होंने एनएचएआई से इन सवालों का जवाब देने की मांग की। भवन मालिकों ने सरकार और प्रशासन से दो टूक कहा कि उन्हें किसी भी सूरत में टनल का निर्माण मंजूर नहीं है। फोरलेन का निर्माण पुराने सर्वे के अनुसार ही किया जाए, ताकि उनके सैकड़ों घर सुरक्षित रह सकें।