एंट्री टैक्स लगने से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्ति होगी।
हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन शापिंग पर एंट्री टैक्स लगाने का प्रस्ताव पारित होने से जहां सूबे के कारोबारी खुश हैं, वहीं ऑनलाइन शापिंग करने वाले खरीदारों का मूड ऑफ हो गया है। प्रदेश के कारोबारियों का कहना है एंट्री टैक्स लगने से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्ति होगी। प्रतिस्पर्धा करने का भी मजा आएगा। उधर, ऑनलाइन शापिंग पर टैक्स से युवा ग्राहक निराश हैं।
इनका कहना है कि सरकार के इस कदम से अब ऑनलाइन सामान महंगा मिलेगा। हिमाचल में औसतन हर साल करीब सौ करोड़ रुपये का ऑनलाइन कारोबार होता है। बीते दो साल के दौरान प्रदेश में ऑनलाइन शापिंग करने वालों की संख्या बढ़ी है। कुरियर कंपनियों के माध्यम से हिमाचल के घरों और कार्यालयों में रोजाना हजारों रुपयों का सामान पहुंच रहा है।
मोबाइल फोन और कंप्यूटर के माध्यम से लोग आफिस, घर में बैठकर अपनी पसंद का सामान खरीद रहे हैं। जूते, कपड़ों के अलावा इलेक्ट्रानिक्स और घर का सजावटी सामान भी ऑनलाइन ही मंगवाया जा रहा है। शहरों में जहां कुरियर कंपनियां सामान पहुंचा रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में डाक विभाग ने बड़ी-बड़ी ऑनलाइन शापिंग कंपनियों के साथ करार किया है।
डाकिये गांवों में सामान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय कारोबारियों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। हिमाचल के कारोबारी बीते एक साल के दौरान मुख्यमंत्री और आबकारी एवं कराधान मंत्री से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। ऑनलाइन शापिंग पर टैक्स लगाने की मांग को लेकर कारोबारियों ने प्रदर्शन भी किए। जिसके चलते राज्य सरकार ने बजट सत्र में विधेयक लाकर ऑनलाइन शापिंग पर एंट्री टैक्स लगाने का फैसला लिया है।
शिमला व्यापार मंडल के प्रधान इंद्रजीत सिंह ने बताया है कि ऑनलाइन कंपनियों ने टैक्स फ्री राज्यों में अपने वेयर हाउस बनाए हैं। प्रदेश में बिना कोई टैक्स चुकाए सामान पहुंचाया जा रहा है। जबकि कारोबारी केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगाए गए सभी टैक्स चुका रहे हैं। ऑनलाइन शापिंग से कारोबार प्रभावित हुआ है। एंट्री टैक्स लगने से प्रतिस्पर्धा होगी।
उधर, शिमला विश्वविद्यालय के लॉ स्टूडेंट अमित कुमार, प्रशांत शर्मा का कहना है कि सरकार ने एंट्री टैक्स लगाकर कारोबारियों को राहत देते हुए लाखों ग्राहकों पर आर्थिक बोझ डाल दिया है। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।