टौर के पत्ते में कई औषधीय गुण हैं। हिमाचल में टौर पत्ते समुद्र तल से 1,500 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिलता है। अब 2,000 मीटर ऊंचाई तक मिल रहा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन अधिक होता है। इस पत्ते में भूख बढ़ाने जैसे गुण भी हैं।
औषधीय गुणों से भरपूर पारंपरिक टौर पत्तल ऑफ सीजन में भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। पत्तल पांच माह तक खराब नहीं होंगे। यह सब आधुनिक मशीन के जरिये संभव हो पा रहा है। मशीन के जरिये पत्तों की नमी सोखकर उसे एक प्लेट का आकार दिया जा रहा है। इससे हिमाचल के दूसरे जिलों और बाहरी राज्यों में भी इन पत्तलों को आसानी से सप्लाई किया जा सकेगा। बशर्ते टौर की पत्तल बनाते हुए सावधानी बरतनी पड़ेगी। नमी वाला पत्ता रहने पर यह खराब हो सकता है।
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मंडी जिला सहित प्रदेश के अन्य जिलों में शादी समारोह या फिर बड़े आयोजनों में टौर के पत्तों से बनी पत्तलों पर खाना परोसा जाता है। जिले की महिलाएं पीढ़ी दर पीढ़ी टौर के पत्तों की पत्तलें बनाने का पारंपरिक कार्य करती आ रही हैं। जाइका परियोजना में वन मंडल मंडी के कुछ स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों को पत्तलें बनाने की मशीन उपलब्ध करवाई गई हैं। महिलाएं पहले जंगल से टौर पत्ते एकत्रित करती हैं और फिर सामान्य टौर पत्तल बनाती हैं।
बाद में इसे मशीन रखकर इसे आधुनिक रूप दिया जाता है। मशीन टौर पत्तों की नमी को सोख लेती हैं। इससे यह प्लेट आसानी से स्टोर की जा सकती है। यह पत्तल अब चार रुपये में बिक रही है। मशीन के जरिये टौर पत्तल बनानी वाली महिलाएं रीता देवी व सुमित्रा देवी ने बताया कि अब उन्हें अधिक आमदनी हो रही है। आधुनिक तरीके से बन रही पत्तलों की मांग भी बढ़ रही है। बता दें कि मंडी शहर में सामान्य टौर पत्तलें सीजन के दौरान हाथोंहाथ बिकती हैं।
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खाना पचाने में सहायक हैं टौर पत्तों की बनी पत्तल
टौर के पत्ते में कई औषधीय गुण हैं। हिमाचल में टौर पत्ते समुद्र तल से 1,500 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिलता है। अब 2,000 मीटर ऊंचाई तक मिल रहा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन अधिक होता है। इस पत्ते में भूख बढ़ाने जैसे गुण भी हैं। ऐसे में यह पत्तल पर्यावरण संरक्षण के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
टौर पत्तों में कई तरह के औषधीय गुण हैं। इन पत्तों से बनी पत्तलें सेहत के लिए अप्रत्यक्ष तौर से अच्छी हैं। सामान्य के मुकाबले मशीन से बनी टौर पत्तलों में गुणों का प्रभाव थोड़ा कम होता है, लेकिन यह खत्म नहीं होते हैं। - डॉ. तारा सेन ठाकुर, सहायक प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान विभाग, वल्लभ कॉलेज मंडी।
मशीन के जरिये टौर के पत्तल बनाने पर इसे अधिक समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। करीब पांच माह तक रखने के बावजूद यह खराब नहीं हुई हैं। महिलाएं मशीन से पत्तल बनाते हुए पुराने पत्तों का इस्तेमाल करें तो और अधिक समय तक इन पत्तलों को स्टोर किया जा सकता है। इस तरह महिलाएं अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर सकती हैं। जाइका परियोजना की तरफ महिलाओं प्रशिक्षण देने के अलावा मशीनें मुहैया करवाई गई हैं। - जितेन शर्मा, एसएमएस, जाइका, वन मंडल मंडी