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Shimla News: वैज्ञानिक ढंग से करें बगीचों की देखभाल, पौधों में होगा सुधार

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उद्यान विभाग के निदेशक ने बागवानों को जारी की हिदायत, तने से एक फीट की दूरी तक न करें खोदाई
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प्रति पौधा 10 किलो सड़ी हुई गोबर खाद डालें
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बारिश और बर्फबारी के बाद बगीचों में नमी बढ़ गई है। इस समय वैज्ञानिक ढंग से की गई देखभाल से पौधों की जड़ों की सेहत में सुधार होता है और आने वाली फसल मजबूत बनती है।

हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग के निदेशक विनय सिंह ने बागवानों से आग्रह किया कि वह तने के चारों ओर तौलिया (बेसिन) बनाएं। इसकी तने से कम से कम एक फीट की दूरी तक खोदाई न करें ताकि पानी के रिसाव अथवा घाव के कारण मुख्य जड़ें क्षतिग्रस्त न हों। निदेशक उद्यान ने बताया कि प्रति पौधा लगभग 10 किलो सड़ी हुई गोबर खाद या 5 किलो केंचुआ खाद तने से दूर समान रूप से फैलाकर मिट्टी में दबानी चाहिए। यदि मिट्टी जांच रिपोर्ट में सिंगल सुपर फास्फेट की सिफारिश की गई हो तो ऐसी स्थिति में तने से लगभग 1.5 फीट दूर गोल नाली बनाकर खाद डालें और मिट्टी से ढक दें। उन्होंने कहा कि यदि मिट्टी जांच में पोटाश की आवश्यकता दर्शाई गई हो तो 5000 से 7000 फीट ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तने से 1.5 फीट दूर पोटाश को फैलाकर मिट्टी में मिलाएं।
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बारिश और बर्फबारी के बाद नया बगीचा लगाने के लिए सबसे पहले खेत का सही रेखांकन (ले-आउट) करना आवश्यक है। रूट स्टॉक के अनुसार दूरी रखते हुए एमएम 111, एम 7 और एमएम 106 में पौधे से पौधे की दूरी 2 मीटर और कतार से कतार की दूरी 3 मीटर रखें। एम 9 रूट स्टॉक के लिए पौधे से पौधे की दूरी एक मीटर और कतार से कतार की दूरी 3 मीटर उपयुक्त रहती है। रेखांकन के बाद गड्ढे या लाइन खोदने का कार्य करें। पत्थर वाली भूमि में पत्थर निकलने तक अथवा कम से कम 4 फीट गहराई तक खोदाई अवश्य करें।
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अच्छी किस्म के पौधे खरीदें : सिंह
निदेशक उद्यान विनय सिंह ने बागवानों से आग्रह किया है कि वह अच्छी गुणवत्ता और बदलते मौसम के अनुरूप कम चिलिंग वाली किस्मों के पौधों की खरीद के लिए अपने नजदीकी उद्यान विभाग की नर्सरी, नजदीकी उद्यान प्रसार अधिकारी, उद्यान विकास अधिकारी, विषय विशेषज्ञ (बागवानी) या उपनिदेशक उद्यान से संपर्क करें। पौधे खरीदते समय बिल अवश्य प्राप्त करें ताकि बागवान एकीकृत बागवानी मिशन के तहत अनुदान का लाभ ले सकें। उच्च सघन खेती में बगीचा लगाने पर प्रति हेक्टेयर 3,75,000 रुपये का अनुदान मिलता है।
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