मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की आपत्तियों के चलते ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में जुलाई से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने पर संशय है। करीब 756 करोड़ रुपये से नेरचौक में बन रहे ईएससीआई मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण में एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने कई खामियां पाई हैं।
इससे इसी साल से कक्षाएं शुरू करने के प्रयासों पर तलवार लटक गई है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से कुछ घंटे पहले केंद्रीय श्रम मंत्री ऑस्कर फर्नांडीज और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। हालांकि, करोड़ों रुपये से बन रहा मेडिकल कॉलेज पूरी तरह तैयार नहीं है।
इसे जोनल अस्पताल मंडी से अटैच कर जुलाई से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने का प्रयास है। इसके चलते गत दिनों एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने कॉलेज और जोनल अस्पताल का निरीक्षण किया। एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने को लेकर एमसीआई की टीम संतुष्ट नहीं दिखी।
निरीक्षण में कई खामियां पाई गईं। कॉलेज में अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने ईएसआईसी को कोई बिल्डिंग नहीं सौंपी है। साथ ही लेक्चरर थियेटर तैयार नहीं है। ग्राउंड फ्लोर दो और पांच में फर्नीचर न होने के साथ बिजली कार्य भी अधूरा है।
इसके अलावा एनाटॉमी म्यूजियम, मृत शरीर के रखरखाव, डीन ऑफिस भी तैयार नहीं है। जोनल अस्पताल में भी एमसीआई ने ओपीडी, माइनर ओटी और अन्य कमियां पाई हैं।
उधर, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन डा. डीएस धीमान का कहना है कि जुलाई से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने को प्रयास किया जा रहा है। एमसीआई की आपत्तियों को पूरा किया जा रहा है। कॉलेज चलाने की अप्रूवल के लिए दोबारा से आवेदन करना होगा। कम समय में एमसीआई की आपत्तियों को दूर करना एक चुनौती है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डा. राजीव बिंदल ने कहा कि कॉलेज और अस्पताल पर सरकार गंभीर नहीं है। अगर सरकार ने कक्षाएं ही चलानी थीं तो वह 2009 से ही चलाई जा सकती थीं। भाजपा सरकार के समय लोगों की सुविधा को बल्ह घाटी में 168 बीघा जमीन मात्र एक रुपये की लीज पर ईएसआईसी को दी थी।
प्रदेश के स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज में कक्षाएं बैठाने के लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है।