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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदेश्ा के 5769 परिवारों को राहत

Wed, 10 Feb 2016 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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हिमाचल प्रदेश नौतोड़ रूल्स, 1968 के तहत सरकारी कर्मचारियों समेत अन्य को दी गई जमीनों को वापस लेने संबंधी शिमला हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत का यह अंतरिम आदेश राज्य के 5769 परिवारों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रारंभिक दलीलों को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट उनकी अपील पर विस्तृत सुनवाई करने को तैयार हो गया है। सामान्य प्रक्रिया के तहत इस अपील पर सुनवाई चार-पांच सालों के बाद ही संभव है, लिहाजा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक यह रोक बरकरार रहेगी।

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार द्वारा दाखिल याचिका पर विस्तृत सुनवाई के लिए तैयार हो गई है। पीठ ने हाईकोर्ट द्वारा 25 जून 2015 को दिए फैसले पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जेएस अत्री ने पीठ के समक्ष कहा कि हिमाचल प्रदेश नौतोड़ रूल्स, 1968 बनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि राज्य की बंजर जमीनों को खेती लायक बनाया जाए।
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इन जमीनों पर खेती के अलावा, बागवानी, पशुपालन आदि हो सके। उन्होंने कहा कि इस नीति के जरिये सरकार राज्य में खाद्य पदार्थों के पैदावार बढ़ाकर आत्मनिर्भर होना चाहती थी। इसके तहत एक परिवार अधिकतम 20 बीघा जमीन प्राप्त कर सकते था। उन्होंने बताया कि सरकार की पॉलिसी के तहत उन लोगों को यह जमीनें दी जानी थी जिनके पास जमीन या तो 10 बीघा से कम हो या जिनकी वार्षिक आमदनी दो हजार से कम हो।

राज्य सरकार ने नरेंद्र लाल नेगी के मामले में हाईकोर्ट के निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वरिष्ठ वकील ने बताया कि हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि यह नियम सरकारी नौकरों के लिए नहीं है। हाईकोर्ट ने गत जून को दिए अपने आदेश में वित्तीय आयुक्त को उन 5769 मामलों के रिकार्ड की जांच करने का आदेश दिया था, जिन्हें नौतोड़ जमीनें दी गई थी।

ये मामले सरकारी कर्मियों और जिनकी आमदनी दो हजार रुपये से कम थी, उनसे संबंधित थे। आयुक्त को इन सभी मामलों की जांच कर यह पता लगाने के लिए कहा गया था कि इन परिवारों को नियम के तहत जमीनें दी गई थी या नहीं।

नियम के अनुसार नहीं दी गई जमीनों को वापस लेने का निर्देश दिया गया था। साथ ही आयुक्त को यह भी निर्देश दिया गया था कि अगर इन लोगों को मुआवजा दिया गया हो तो वह भी वापस लिया जाना चाहिए।
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