अब किसके पास कितने विधायक
छह विधायकों को बर्खास्त करने के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 के बजाय 62 सदस्य रह गए हैं। कांग्रेस के 34, भाजपा के 25 और तीन निर्दलीय विधायक हैं। निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा सदस्य के चुनाव में भाजपा का साथ दिया है। अगर वे भाजपा के साथ बने रहते हैं तो भी भाजपा के पास 28 सदस्य होंगे। यानी कांग्रेस सरकार के पास वर्तमान में बहुमत है। राज्य सरकार में बने रहने के लिए 32 विधायक होने चाहिएं। अगर छह बागियों की बहाली हो जाती है तो ही कांग्रेस के लिए फिर से परेशानी हो सकती है। वहीं, दिनभर गहमागहमी के बीच कांग्रेस विधायक दल और भाजपा विधायकों ने बैठक की। कांग्रेस सरकार को स्थिर करने में जुटी हुई है तो भाजपा आगामी रणनीति बनाने में लगी रही।
हाईकोर्ट से राहत न मिली तो उपचुनाव के बन सकते हैं हालात
सदस्यता चले जाने के बाद बर्खास्त विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी है। हाईकोर्ट के फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अगर फैसला बागी विधायकों के पक्ष में नहीं आया तो छह महीने के भीतर छह सीटों पर उपचुनाव के हालात भी बन सकते हैं।
भाजपा को ऑपरेशन लोटस के लिए चाहिए 12 विधायक
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमल मनोहर शर्मा ने कहा कि छह कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द करने का निर्णय कांग्रेस सरकार के लिए संजीवनी बन गया है। अब भाजपा को आपरेशन लोटस के लिए 12 विधायकों को अपने पक्ष में करना होगा, जो मौजूदा परिस्थिति में संभव नहीं है। ऐसा करने पर ही कांग्रेस विधायकों पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा।
विधानसभा में पहले और अब की स्थिति
पहले
कुल विधानसभा सदस्य : 68
कांग्रेस विधायक : 40
भाजपा विधायक : 25
निर्दलीय विधायक : 3
बहुमत के लिए जरूरी : 35
अब
कुल विधानसभा सदस्य : 62
कांग्रेस विधायक : 34
भाजपा विधायक : 25
निर्दलीय विधायक : 3
अब बहुमत के लिए जरूरी : 32
विधायकों ने दलबदल विरोधी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया : पठानिया
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि दलबदल विरोधी कानून में छह विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया है। अब यह विधानसभा सदन के सदस्य नहीं रहे। दलबदल कानून में सभी छह बागी विधायकों की सदस्यता को सदन से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आया राम और गया राम की बात या खरीद-फरोख्त होने की स्थिति को भी उन्हें देखना होता है। पठानिया ने कहा कि छह विधायकों के खिलाफ संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधानसभा सचिवालय को दलबदल कानून के तहत याचिका दी थी। इन बर्खास्त विधायकों ने चुनाव कांग्रेस पार्टी से लड़ा, लेकिन सदन में दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को सुना गया।
उन्होंने कहा कि बुधवार चार बजे सुनवाई शुरू हुई और छह बजे तक चली। इसमें बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि समय दिया जाए। उन्हें कहा गया कि यह रिकॉर्ड का मामला है। छह विधायक बजट पारित करते समय उपस्थित नहीं हुए। अब इन्हें विधानसभा के सदस्य पद से अयोग्य घोषित किया गया है। अब सदन के सदस्य नहीं हैं। पठानिया ने कहा कि हालांकि यह आदेश न्यायिक जांच का विषय होगा। इन विधायकों को ई-मेल और व्हाट्सएप से सूचित कर दिया गया था। अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने 30 पन्नों का विस्तृत फैसला दिया है।
रजिस्टर में हस्ताक्षर किए, 5,000 रुपये दैनिक भत्ता मिलता है विधायकों को
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों ने रजिस्टर में हस्ताक्षर किए। इसका उन्हें 5000 रुपये दैनिक भत्ता मिलता है। वे परिसर में उपस्थित होने के बावजूद वित्त विधेयक का पारण करने के समय उपस्थित नहीं हुए।