एचपीयू से निष्कासित छह छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। इनकी पढ़ाई अधर में लटकी पड़ी है। विवि में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान इन छात्रों पर संगीन आरोप लगे थे। इसके बाद इन्हें निष्कासित कर दिया था। लेकिन 18 सितंबर 2014 को निष्कासित यह छात्र अभी तक अपनी पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए हैं।
अब हैदराबाद केंद्रीय विवि में छात्र की खुदकुशी मामले के बाद यह विवाद दोबारा गरमाने लगा है। एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने हैदराबाद में छात्र की खुदकुशी के मामले की कड़ी निंदा की है। छात्र नेताओं का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की तरह छात्रों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। विवि में बढ़े राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते लगातार छात्र आंदोलनों को कुचलने के प्रयास हो रहे हैं।
कभी लाठीचार्ज कर छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास हुआ, तो कभी बेतहाशा फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को निष्कासित करने के फरमान जारी किए गए। वर्ष 2014 में 18 सितंबर को फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन करने वाले एसएफआई और आम छात्रों के पर लाठीचार्ज किया गया।
छात्र नेताओं को निष्कासित किया गया। एसएफआई इकाई अध्यक्ष नोबेल ठाकुर और सह सचिव अदिति ने चेताया कि निष्कासित किए सभी छह छात्रों की पढ़ाई रुक गई है। वे डिग्री पूरी करने को कक्षाएं तक नहीं लगा पाए और न ही परीक्षाएं दे पाए। निष्कासन के विवि प्रशासन के आदेशों के चलते उनका कैरियर दांव पर है।
ये छात्र मानसिक रूप से डेढ़ साल से परेशान हैं। इन निष्कासित छात्रों में से यदि किसी ने हैदराबाद विवि की तरह से ऐसा कोई कदम उठाया तो इसके लिए पूरी तरह से विवि प्रशासन और प्रदेश सरकार ही जिम्मेदरा होगी। छात्र नेताओं ने हिमाचल विवि में छात्रों के निष्कासन को वापस लेने पर जल्द फैसला लेने की मांग की है।
18 सितंबर को ये छात्र हुए थे निष्कासित- हिमाचल विश्वविद्यालय ने फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन कर रहे एसएफआई के छह छात्र नेताओं को निष्कासित किया था। इन छात्रों की विवि परिसर में एंट्री तक पर प्रतिबंधित है। इसमें पीयूष सेवल (एमसीए 5वां सेमेस्टर), होशियार सिंह (एमएससी फिजिक्स 5वां सेमेस्टर) पुनीत धांटा (एमसीए प्रथम सेमेस्टर)
राहुल चौहान (डिप्लोमा ट्राईबल स्टडीज प्रथम सेमेस्टर) विक्रम कायथ एमटीए (अंतिम सेमेस्टर) और संजीव कुमार (एलएलबी छटा सेमेस्टर) शामिल हैं। इन छात्रों के निष्कासन के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई आगे करने से रोक दिया गया है। आज डेढ़ साल से अधिक का समय बीत जाने पर भी इन छात्रों का निष्कासन रद्द नहीं हो पाया है।