वैसे तो देवभूमि हिमाचल में कई अनोखी परंपराएं आज भी विद्यमान है। मगर ये उन सबसे अलग है। यहां देवी देवताओं के अलावा दो राक्षस भाई बहन की भी पूजा की जाती है। इनके आगमन पर पूरे गांव में उत्सव मनाया जाता है।
हर घर में अच्छे पकवान बनते हैं और लोग इन्हें खुद ग्रहण करने से पहले दोनों राक्षस भाई बहन को परोसते हैं। दो तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव में लोग नाचते गाते भी हैं और विदाई के समय भी इन्हें पूजते हैं।
यह परंपरा हिमाचल के जिला कुल्लू के ऊझी घाटी के हलाण-1 गांव में आज भी प्रचतिल है। यहां फागली उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला त्योहार दरअसल राक्षस भाई बहन को समर्पित किया जाता है। आइए हम बताते हैं पूरी कहानी।
ऐसे शुरू हुई परंपरा
गांव के लोग आज भी इस कहानी को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे चला रहे हैं। लोगों के अनुसार पुराने समय में टुंडिया राक्षस और उसकी बहन टिंबर विशाचकी इस गांव में अक्सर आते जाते थे। ये लोगों के घर पर खूब तबाही मचाते थे।
लोग कई सालों तक इनका अत्याचार सहते रहे। दोनों भाई बहन कई तरह से लोगों को परेशान करते थे। आखिरकार लोग देवताओं की शरण में चले गए। बाद में देवताओं और इन दोनों राक्षस भाई बहन के बीच संधि हुई।
लोगों के अनुसार गांव के सभी लोगों ने राक्षसों को इस गांव में न आने की प्रार्थना की। लोगों ने भरोसा दिया कि साल के कुछेक दिन उनका आहवान किया जाएगा और उनकी खूब सेवा भी की जाएगी।
आज भी आते हैं दोनों भाई बहन
इस संधि के बाद राक्षस भाई बहन ने भी गांव में आना छोड़ दिया। उसी दिन से साल के कुछेक दिन गांव के लोग फागली उत्सव मनाते हैं। इस उत्सव का आगाज तभी होता है जब दोनों भाई बहन इसमें शामिल होते हैं।
उत्सव की शुरुआत में ही इनका आहवान किया जाता है। इनके लिए हर घर में पकवान बनते हैं। खाना खाने से पहले ये पकवान परोसे जाते हैं। उत्सव के दौरान गांव की महिलाएं खास तरह के मुखौटे पहनकर नृत्य भी करती हैं।
इसके बाद पूजा अर्चना कर दोनों को वापस विदा किया जाता है।
इस बार भी विदा हुए राक्षस
ऊझी घाटी के हलाण-1 गांव में रविवार को टिंबर विशाचकी को फागली उत्सव के दौरान विदाई दी गई। नग्गर से सटे हलाण-1 क्षेत्र के गांव हलाण में रविवार को इस अनोखी परंपरा का निर्वहन किया गया। फागली में लोगों ने परंपरा अनुसार मखौटे पहनकर नृत्य किया।
मखौटा नृत्य को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान देवता वासुकी नाग ने विभिन्न रस्सों को पूरा किया। देवता वासुकी नाग के कारदार जयचंद नेगी ने बताया कि फागली में देवता की ओर से सभी परंपराओं का निर्वहन किया गया।
उन्होंने कहा कि फागली उत्सव में मुखौटा नृत्य मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। परंपरागत नृत्य को देखने के लिए समस्त ऊझी घाटी लोग हलाण पहुंचे। फागली में गांववासियों ने मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन भी परोसे।