यह सच्ची कहानी हौसले की है। जिंदगी से हार न मानकर दुश्मन को उसके किए की सजा देने की। जो ऊंचे कुल की आड़ में महिलाओं, बच्चियों से दुराचार को शौक मानते हैं और रुपयों के वजन से उनकी जुबान सिलने को अपना वर्चस्व। कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन पंजाब का अनपढ़ रीयल हीरो बंत सिंह अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय साहित्यकारों, शिक्षाविदों और लेखकों में शीर्ष और
अहम जगह बना गया। मेरी दोनो बाजूएं काट दीं, एक पैर कट गया, लेकिन मेरी जुबान नहीं काट पाए। आज मेरी नाबालिग बेटी के बलात्कारी ऊंचे कुल के लड़के सलाखों के पीछे हैं। भगत सिंह की तरह इंकलाबी हूं, जब तक जिंदा हूं, खुद्दारी और जुल्म न सहने की प्रवृति से जीऊंगा।
आवाज न दबी तो बेरहमी से बाजू और पैर काट दिए
बंत सिंह पंजाब की जानी-मानी बुलंद आवाज बन चुके हैं। लिटफेस्ट में उनके बुलंद हौसले और जुल्म के खिलाफ कभी हार न मानने की प्रवृति को सम्मान दिया गया। आजकल बंत सिंह लेखिका निरूपमा दत्त की किताब द बैलेडस ऑफ बंत को लेकर काफी चर्चा में हैं। बंत सिंह ने बताया कि उनकी बेटी का रेप ऊंचे कुल के लड़कों ने किया।
उन्होंने इसके खिलाफ उठाई। उन्हें दस लाख और कई किले जमीन की पेशकश की गई। वह नहीं माने। कानूनी लड़ाई जारी रखी। कास्मेटिक्स बेचने का कारोबार तबाह कर दिया। उसके बाद भी आवाज न दबी तो बेरहमी से दोनों बाजूओं और एक पैर को जख्मी कर
खेतों में फेंक दिया। लोहड़ी का त्योहार होने की वजह से उन्हें किसी ने देखा नहीं। अस्पताल ले जाने में देरी हो गई। गैंगरीन के कारण एक पैर काटना पड़ा। उसके बाद भी लड़ाई तब तक जारी रखी, जब तक उन्हें सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा दिया।
कटी बाजू, कटी टांग फिर गुनगुनाते रहे गीत
चर्चा के दौरान कहा गया कि जब अस्पताल में चिकित्सक ने बंत सिंह से कहा कि उनकी दोनों बाजूएं और टांग नहीं रही तो वह मुस्कुराते रहे और जिंदगी से कभी न हार मानने वाला गीत गाते रहे।
कल्लू तेरा पुत रब्ब ने पढ़ाया
हादसे के बाद उनकी बेटी का विवाह उनसे बेहतर परिवार में हुआ। अब उसके तीन बच्चे हैं। बंत में गजब का सिंगिंग और कविताएं
बनाने का टैलेंट है, लेकिन वे अनपढ़ हैं। कई संस्थाओं ने पढ़ाने की पेशकश की।
लेकिन उनका कहना था कि वे उस कुल से हैं, जहां नानक ने भी पढ़ाई करने से मना कर दिया। यहां कहावत है कि कल्लू तेरा पुत रब्ब ने पढ़ाया। मतलब संघर्ष ने ही उसे पढ़ाया।