बीते वर्ष के मुकाबले 1 से 2 रुपये तक बढ़े बॉक्स के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में स्टोन फ्रूट (गुठलीदार फल) के सीजन के बीच पैकिंग सामग्री महंगी हो गई है। इस बार कार्टन बीते वर्ष के मुकाबले 1 से 2 रुपये तक प्रति बॉक्स मंहगा हुआ है। कार्टन की कीमतें बढ़ने के कारण बागवानों की पैकिंग की लागत बढ़ गई है। कार्टन के दामों ने बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
बागवानों का कहना है कि सरकार और विभाग का स्टोन फ्रूट के लिए प्रयोग होने वाले कार्टन पर कोई नियंत्रण नहीं है। बागवानों को खुले बाजार से कार्टन खरीदना पड़ता है। कार्टन कारोबारी हर साल अपनी मनमानी करते हैं और अपनी मर्जी से दाम बढ़ा देते हैं। इस कारण बागवानों को हर साल महंगाई की मार पड़ रही है। बागवानों ने बताया कि इस बार भी स्टोन फ्रूट कार्टन महंगा कर दिया है। बाजार में पीनट बॉक्स का रेट 7 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति बॉक्स, 2 किलो वाले गेट कार्टन का रेट 14 रुपये से बढ़कर 15 रुपये और 4 किलो वाले 16 सिक्का कार्टन का दाम 16 रुपये की जगह 18 रुपये हो गया है।
बागवानों का कहना है कि पहले ही मजदूरी, स्प्रे और ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है। अब कार्टन के दाम बढ़ने से स्टोन फ्रूट को मंडियों तक पहुंचाना और महंगा हो जाएगा। इसका ज्यादा असर छोटे बागवानों पर पड़ेगा। बागवानों का कहना है कि जिले में काफी मात्रा में स्टोन फ्रूट का उत्पादन हो रहा है। चेरी, आड़ू, प्लम, खुमानी और नाशपाती समेत कई अन्य स्टोन फ्रूट का उत्पादन होता है। इसके लिए भारी मात्रा में कार्टन का इस्तेमाल होता है। बागवानों ने मांग करते हुए कहा कि सरकार स्टोन फ्रूट की पैकिंग सामग्री के दामों को नियंत्रित करें ताकि बागवानों को हर साल कार्टन के दामों की वजह से आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
कार्टन के लिए नियम बनाए सरकार
स्टोन फ्रूट की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कार्टन पर सरकार और विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। हर साल व्यापारी मनमाने तरीके से इसके रेट बढ़ा देते हैं। सरकार को सेब की तर्ज पर इसके कार्टन को भी रेगुलेट करना चाहिए। सेब उत्पादक संघ की मांग है कि सरकार को स्टोन फ्रूट के कार्टन के नियम बनाने चाहिए।
-सोहन ठाकुर, अध्यक्ष सेब उत्पादक संघ
हर साल बढ़ जाते हैं कार्टन के दाम
जिले में स्टोन फ्रूट का सीजन शुरू हो चुका है। किसान बाजारों से स्टोन फ्रूट की पैकिंग के लिए कार्टन खरीद रहे हैं। इस बार भी दुकानदारों ने दाम बढ़ा दिए हैं। दुकानदार हर साल इसके दाम बढ़ाते हैं। एक तरफ बागवानों को मौसम की मार झेलनी पड़ रही है, दूसरी तरफ लागत लगातार बढ़ रही है। बागवानी अब घाटे का सौदा बन रहा है। सरकार को स्टोन फ्रूट के कार्टन के दामों के लिए नियम बनाने चाहिए ताकि बागवानों की लूट पर रोक लग सके।
-प्रेम चौहान, किसान सभा जिला सचिव
कोट
एचपीएमसी एमआईएस के तहत आने वाले फलों के कार्टन को ही रेगुलेट करती है। इसके विषय में उन्हें जानकारी नहीं है। जानकारी लेने के बाद ही इसके बारे में कुछ बता पाएंगे।
-डीसी राणा, प्रबंध निदेशक एचपीएमसी