हिमाचल प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने धनोटू विकास खंड के पलोहटा गांव में लगभग 50 किसानों के सामने खेतों में स्प्रेयिंग ड्रोन से धान की फसल में नैनो यूरिया का छिड़काव किया। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद ने बताया कि ड्रोन तकनीक से एक एकड़ क्षेत्रफल में 10 लीटर स्प्रे से लगभग 10 मिनट में फसलों में छिड़काव किया जा सकता है। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य कृषि में ड्रोन तकनीक के प्रयोग के प्रति किसानों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि फसलों को उचित पोषण देने के लिए विभिन्न उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।
फसलों को रोग और कीटों से बचाने के लिए बहुत से कीटनाशक इस्तेमाल होते हैं। इन्हें प्रचलित तरीके से खेतों में प्रयोग करने में किसानों की अधिक लेबर व अधिक मात्रा में कीटनाशकों के साथ पानी की ज्यादा खपत होती है। साथ ही कीटनाशकों के संपर्क में आने से मानव, पशु स्वास्थ्य व पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ता है। इसलिए कृषि के वर्तमान परिवेश में ड्रोन तकनीक काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। डॉ. डीएस यादव ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से कृषि में ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 17.50 लाख की परियोजना स्वीकृत की गई है। चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय से जीआई एक्सपर्ट कुणाल सूद ने भी किसानों को ड्रोन तकनीक के फायदों के बारे में बताया।