विशेष बच्चों की जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता में बच्चों की भावनाओं से जमकर खेल गया। कंकर और पत्थर से भरे ट्रैक पर विशेष बच्चों को नंगे पैर दौड़ाया गया। पैर में चोट आई तो उनके लिए फर्स्ट ऐड तक का बंदोबस्त नहीं था। बिना जमीन खोदे और रेत बिछाए लांग जंप करवाए गए। प्रतियोगिता के दौरान बच्चों को चोट लगने से खून बहा लेकिन आयोजकों का दिल तक नहीं पसीजा।
विभाग ने महज खेल प्रतियोगिता के आयोजन की औपचारिकता ही पूरी की। यह सब हुआ जिला युवा सेवाएं एवं खेल विभाग की ओर से अक्षम बच्चों की ढली स्थित मूक बधिर संस्थान में आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता में। आयोजन स्थल पर विभाग का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। प्रतियोगिता के आयोजन के लिए पांच कोचों की ड्यूटी लगाई थी लेकिन मौके पर तीन महिला कोच ही पहुंचीं।
एक घंटे देरी से मिला बच्चों को खाना
जिला और राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता के आयोजन के लिए 45,000 रुपये का बजट स्वीकृत किया था। लेकिन बिना बुनियादी सुविधाओं के ही प्रतियोगिता निपटा दी गई। अक्षम बच्चों को स्कूल की वर्दी में ही बिना जूतों के रेस के ट्रैक पर दौड़ाया गया। विभाग के कोचों से जब अव्यवस्था का कारण पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे सके।
मैदान में फर्स्ट एड मौजूद न होने का कारण पूछा गया तो स्कूल की प्रधानाचार्या विनय कुमारी ने बताया कि फर्स्ट एड हास्टल में है जरूरत पड़ने पर मैदान में लाया जाएगा।मूक बधिर संस्थान के बच्चों को तय समय के मुकाबले डेढ़ घंटा देरी से लंच परोसा गया। भूख के मारे छोटे बच्चों ने तो रोना भी शुरू कर दिया। जब स्कूल प्रबंधन से लंच में देरी का कारण पूछा तो जवाब मिला कि खेल प्रतियोगिता के आयोजन के कारण लंच देरी से तैयार हुआ।
बजट में कमी से दिक्कत: प्रेम शर्मा
जिला युवा सेवा एवं खेल अधिकारी प्रेम शर्मा ने बताया कि जिला और राज्य स्तरीय खेल कूद प्रतियोगिता के आयोजन के लिए 45 हजार का बजट रखा है। इतने बजट में बच्चों के लिए किट की व्यवस्था मुश्किल है।
फिर भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए जाने वाली टीम को किट दी जाएगी। बजट कम होने से जितनी व्यवस्था संभव थी उतनी की गई। भविष्य में व्यवस्थाएं सुधारने की कोशिश की जाएगी।