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भूखे पेट संभाला था मोर्चा, गोलियों, तोपों से मनाई थी दिवाली

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हिंद सेना के 40 जवानों ने नागालैंड के ब्लांग सेक्टर के ट्रांइजंक्सन में चीन की पूरी सेना को एक दिन रोक रखा था। तेजू हवाईअड्डे से तीन बजे के बाद कोई हेलीकॉप्टर न मिलने से हिंदोस्तान की एक पलटून ही बॉर्डर तक पहुंच पाई थी। सामने चीन की विशाल सेना को देखकर भारतीय जवानों ने उनका डटकर सामना किया तथा एक दिन तक रोके रखा था। पलटून में उनके साथ जवानों ने 1962 की दिवाली ब्लांग सेक्टर में गोलियों की बौछारों तथा तोपों के गोलों के बीच मनाई थी।
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देश में पटाखे, आतिशबाजी चल रही थी और बॉर्डर पर गोलियों तथा तोप के गोलों से आकाश प्रकाशमान हो रहा था। कई-कई घंटे भूखे रहकर ट्रांइजंक्शन की पहाड़ियों को लांघा गया था। बिलासपुर जिले के स्योथा गांव (छत) के सेवानिवृत्त कैप्टन योगेंद्र सिंह जब 1962 के युद्ध की बात कर रहे थे तो उनमें 75 साल की उम्र में भी 22 साल के जवान का जोश भर गया।
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बोले, 25 किलोमीटर पैदल चलकर संभालने पड़े थे मोरचे

कैप्टन योगेंद्र सिंह बोले कि देश को 75 साल की उम्र में भी जरूरत पड़े तो आज भी वह सरहद पर दुश्मनों को मार गिराने का दम रखते हैं। उस समय तो वह 22 साल के थे। आज 75 साल की उम्र में भी वह पूरी तरह फिट हैं। बताया कि उन्होंने सात लड़ाइयां लड़कर कई मेडल हासिल किए हैं। 1962 में वह तेजू से जहाज में बैठे। उसके बाद 20 से 25 किलोमीटर पहाड़ी चढ़कर ट्रांइजंक्शन पहुंचे। हेलीकॉप्टर से सुबह के नाश्ते में पूरियां गिराई गई थीं।

इनके सहारे एक दिन काटना पड़ा। ब्लांग सेक्टर में चीन की सेना पूरी तरह से तैयार थी। भारत की भी एक पलटून वहां पहुंच गई थी। दिवाली की रात थी, चीनी सैनिकों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दीं। भारतीय जवानों ने भी उनको जवाब दिया। 1962 युद्ध के नायक सेवानिवृत्त ऑनरेरी कैप्टन योगेंद्र सिंह ने बताया कि वन रैंक-वन पेंशन के मुद्दे पर कुछ सैनिक मेडल जलाने की बातें कर रहे हैं। यह बिलकुल गलत है। पूर्व सैनिकों को ऐसा सोचना भी नहीं चाहिए।
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