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फर्जी वोटर का पता करवाने के लिए देने होंगे 200 रुपए

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पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया में यदि कोई मतदाता पर फर्जी होने का सवाल उठाता है तो उसे इसकी जांच के लिए 200 रुपये की फीस भरनी होगी। जांच के दौरान मतदाता को फर्जी पाया जाता है तो संबंधित मतदान केंद्र अधिकारी उसे पुलिस के हवाले कर सकते हैं और उस पर अंगुली उठाने वाले की राशि वापस कर दी जाएगी।
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लेकिन जांच के दौरान मतदाता की पहचान सही होती है तो शिकायतकर्ता के 200 रुपये बतौर दंड सरकारी खजाने में जमा कर लिए जाएंगे। पंचायतीराज चुनाव में यह प्रयोग पहली बार होने जा रहा है। इसकी शुरुआत 26 नवंबर को भरमौर से होगी। इसके साथ ही इस बार टेंडर वोट का भी प्रावधान होगा।
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सरकारी खजाने में जमा होंगे पैसे

यदि कोई मतदाता बिना पहचान के किसी के मत का प्रयोग करके चला जाता है और मतदाता देरी से मतदान केंद्र में पहुंचता है तो उसे खाली हाथ नहीं लौटाया जाएगा। बल्कि टेंडर वोट के नाम पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगा, जिसे अलग से लिफाफे में रखा जाएगा और गिनती के दौरान उस मत का इस्तेमाल होगा। लेकिन, इस प्रक्रिया से पूर्व मतदाता को अपने संबंध में पूरी जानकारी देनी होगी और खुद से जुड़े सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

गलत साबित हुए तो सरकारी खजाने में जमा होंगे पैसे : एसडीएम
एसडीएम भरमौर जितेंद्र कंवर ने पंचायतीराज चुनाव में नए प्रावधानों की पुष्टि की है। बताया कि मतदाता को चैलेंज करने वाले को 200 रुपये की फीस देनी होगी। सही साबित होने पर पैसे वापस हो जाएंगे और गलत साबित होने पर इसे सरकारी खजाने में जमा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह प्रावधान पहली बार आजमाया जा रहा है। इसके लिए भरमौर में सभी मतदान केंद्र प्रभारियों को जानकारी दे दी गई है।
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