प्रदेश सरकार ने सात नदियों के किनारों में पर्यावरण निगरानी और खनन रोकने के लिए नदी पुनर्जीवन कमेटी और विशेष पर्यावरण निगरानी टास्क फोर्स गठित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नदी पुनर्जीवन कमेटी में निदेशक शहरी विकास नोडल अधिकारी होंगे।
जबकि निदेशक उद्योग, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और निदेशक पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीकी विभाग सदस्य होंगे। ये समिति अगले छह महीने में सुखना नदी के सुखना से परवाणू, मारकंड नदी के कालाअंब से नारायणपुर, सिरसा के नालागढ़ से सोलन, अश्विनी के यशवंत नगर के आसपास, ब्यास के कुल्लू से देहरागोपीपुर, गिरी में सैंज के आसपास और पब्बर नदी में रोहणू के आसपास के हिस्सों के उद्धार के लिए एक्शन प्लान तैयार करेंगी।
इनमें जल संचयन, भूजल चार्जर्जिंग, नदियों के न्यूनतम बहाव, ठोस कचरा, व्यापार और सीवेज पर नियंत्रण करना शामिल होगा। इसके अलावा इस काम में विभिन्न विभागों से बजट लेकर खर्च किया जाएगा।
वहीं, विशेष पर्यावरण सर्विलांस टास्क फोर्स में संबंधित जिला न्यायाधीश, जिला लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन द्वारा मनोनीत सदस्य और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल होंगे। ये टास्क फोर्स इन क्षेत्रों में किसी भी तरह के अवैध खनन को रोकने के लिए जिम्मेदार होंगी।
एयर क्वालिटी मानीटरिंग कमेटी भी गठित
पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने एनजीटी के आदेशानुसार एयर क्वालिटी मानीटरिंग कमेटी गठित की है। यह कमेटी दो महीने में प्रदेश के सात प्रदूषित शहरों बद्दी, डमटाल, काला अंब, नालागढ़, पांवटा साहिब, परवाणू और सुंदर नगर में हवा की खराब गुणवत्ता को सुधारने के लिए एक्शन प्लान तैयार करेगी।
इस समिति में निदेशक परिवहन, निदेशक उद्योग, निदेशक शहरी विकास, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, निदेशक कृषि और निदेशक पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शामिल होंगे। समिति एक्शन प्लान बनाने के बाद उसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजेगी और वहां से मंजूर होने के बाद उसे लागू करेगी। एक्शन प्लान में उद्योगों व वाहनों से जनित प्रदूषण की रोकथाम भी शामिल होगी।