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एशिया में पहली बार हिमालय रेंज में बर्फानी तेंदुओं की होगी गिनती

Fri, 16 Nov 2018 12:12 PM IST
सतीश ठाकुर, अमर उजाला, गोहर (मंडी)
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एशिया में पहली बार हिमालय रेंज में बर्फानी तेंदुओं की गणना (सेंसस) का रास्ता साफ हो गया है। हिमाचल के लाहौल-स्पीति और चंबा जिला के बर्फीले क्षेत्र में राज्य पशु बर्फानी तेंदुओं की गणना और इसके संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने 5.15 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। योजना के तहत स्पीति के किब्बर में स्नो लैपर्ड रिसर्च सेंटर भी स्थापित होगा।

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यहां से हर गतिविधि नियंत्रित होगी। इसके अलावा 6 बर्फानी तेंदुओं को स्पीति घाटी की बर्फीली रेंज में रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति मिली है। इस कवायद से बर्फानी तेंदुओं के सटीक आंकड़े जुटाने और इस के संरक्षण के लिए योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। लाहौल-स्पीति की बर्फीली घाटियों में ट्रैप कैमरा और बर्फीले तेंदुए को लगे रेडियो कॉलर का आपस में संपर्क बना रहेगा।

इससे स्नो लैपर्ड के व्यवहार और इसकी गतिविधियों की वन्य प्राणी विभाग जानकारी जुटा सकेगा। भारत में स्नो लैपर्ड रेडियो कॉलरिंग का यह पहला प्रोजेक्ट होगा। हिमालय रेंज में पहली बार यह गणना होगी। इससे पहले मंगोलिया में ही बर्फानी तेंदुओं की गणना हुई है, जो हिमालय रेंज का हिस्सा नहीं है।
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प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी) आरसी कंग ने कहा कि स्नो लैपर्ड के अस्तित्व वाले स्थानों पर लोगों को तेंदुए के बारे में जागरूक किया जाएगा। इस जीव के संरक्षण के लिए लोगों का सहयोग लिया जाएगा। हाल ही में मंडी के जंजैहली में आयोजित राज्य स्तरीय वन सप्ताह के समापन पर आला अधिकारियों ने सीएम से इस पर चर्चा की है।

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नहीं है स्टीक आंकड़ा

हिमाचल में राज्य पशु स्नो लैपर्ड की संख्या का सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। एक अनुमान के अनुसार हिमाचल में वर्तमान समय में 67 स्नो लैपर्ड हैं। वन विभाग के मुताबिक यह आंकड़ा किसी निजी शोधकर्ता का है।

इनकी सही संख्या और संरक्षण को लेकर रवन विभाग और नेचर कंजरवेशन फाउंडेशन स्पीति घाटी में स्नो लैपर्ड पर संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययन करने जा रहे हैं। चंबा में भी स्नो लैपर्ड के होने का अनुमान है।  

करीब से जान सकेंगे स्नो लैपर्ड की गतिविधियां
अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्य प्राणी ललित मोहन ने बताया कि रेडियो कॉलर और ट्रैप कैमरे की मदद से शीत मरुस्थल स्पीति में राज्य पशु स्नो लैपर्ड की जानकारी हासिल की जाएगी। बर्फानी तेंदुओं को लोग करीब से जान सकेंगे।
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