हिमाचल के कुल्लू जिले के समेज गांव को केंद्र सरकार ने अपनी योजना के शुभारंभ के लिए चुना है। इसे धुआं रहित बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। यह गांव टॉप में है। यहां ग्रामीण सबसे कम रसोई गैस का उपयोग कर रहे हैं। ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग कर चूल्हा जला रहे हैं।
इससे गांव के आसपास के जंगलों पर तो बोझ पड़ रहा है। साथ ही धुएं से प्रदूषण भी फैल रहा है। केंद्र की धुआं रहित गांव बनाने की योजना में समेज गांव को टॉप पर रखा है। यहां गत मंगलवार से बिना बुकिंग के रसोई गैस के नए कनेक्शन उपलब्ध करवाने शुरू कर दिए हैं। योजना के प्रति ग्रामीण भी खासी रुचि दिखा रहे हैं।
ग्रामीणों के लिए यह पहला मौका था, जब उनके घरों में आकर अधिकारियों ने रसोई गैस के नए कनेक्शन उपलब्ध करवाए। इससे पहले लोगों को कनेक्शन के लिए कुल्लू जिले या शिमला जिले के रामपुर की गैस एजेंसी में आवेदन करना पड़ता था। बुकिंग के बाद नंबर आने पर रसोई गैस मिलती थी।
नई योजना के तहत गांव में लोगों को घर-द्वार नए कनेक्शन देने के लिए अधिकारी मौजूद रहे। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन शिमला की एरिया मैनेजर मानसी ने बताया कि समेज गांव को धुआं रहित बनाने के लिए योजना शुरू की गई है। काफी लोग योजना से जुड़ रहे हैं।
पहले ही दिन करीब 20 लोगों ने रसोई गैस के नए कनेक्शन लिए। पहले ये लोग ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग कर रहे थे। ग्रामीणों को रसोई गैस के बेहतर उपयोग के बारे में भी टिप्स दिए गए हैं। इसके बाद अब सरपारा गांव को धुआं रहित बनाया जाना है।