दिल्ली से कालका आ रही शताब्दी एक्सप्रेस के इंजन में तकनीकी खराबी आने के कारण सूरजपुर के पास ट्रेन एक घंटे तक रुकी रही। कालका से दूसरा इंजन भेजा गया। इसके बाद यह करीब डेढ़ घंटे विलंब से कालका पहुंच सकी।
इस ट्रेन से हिमालयन क्वीन (शिमला जाने वाली) की भी कनेक्टीविटी है। इसलिए शताब्दी के कालका पहुंचने के बाद ही हिमालयन क्वीन को भी रवाना किया जा सका। शताब्दी लेट होने के कारण हिमालयन क्वीन भी करीब डेढ़ घंटे विलंब से शिमला रवाना हुई।
जानकारी के अनुसार नई दिल्ली से चलकर 11.45 बजे कालका पहुंचने वाली शताब्दी एक्सप्रेस जैसे ही चंडीमंदिर रेलवे स्टेशन से करीब एक किलोमीटर आगे बढ़ी, इंजन में खराबी आ गई। ड्राइवर ने ट्रेन को फाटक नंबर-136 के पास रोक दिया।
इसके काफी देर बाद भी जब ट्रेन नहीं चली तो पैसेंजर भी उतरकर इधर-उधर पूछताछ करने लगे, क्योंकि शिमला जाने वाले सैलानियों को कालका से हिमालयन क्वीन छूटने का डर था। गनीमत रही कि जब तक शताब्दी कालका नहीं पहुंची, हिमालयन क्वीन को भी रोककर रखा गया।
यह थी गड़बड़ी
सूत्रों के अनुसार इंजन में एयर प्रेशर कम हो गया था। यह प्रेशर कम होने से ब्रेक नहीं लगने का खतरा रहता है। इसके अलावा कंप्रेशर पाइप भी फट सकता है। वहीं, चंडीमंदिर से कालका की ओर आते समय शहर में माडल टाउन व धर्मपुर कालोनी के पास रेलवे फाटक हैं। दोनों फाटकों को ट्रेनों की आवाजाही के दौरान बंद कर दिया जाता है।
शताब्दी के आने से पहले तयशुदा समय पर रेलवे फाटक तो बंद कर दिए गए, लेकिन शताब्दी के तय समय पर फाटक से नहीं गुजरने पर गेटमैन भी परेशान हो गए। जब तक गेटमैन के पास शताब्दी के बीच रास्ते रुकने की खबर आई, तब तक पिंजौर-नालागढ़ मार्ग पर फाटक से पिंजौर टी-प्वांइट तक वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं। बाद में बड़ी मशक्कत के बाद ट्रैफिक संचालन सामान्य हो सका।
शताब्दी एक्सप्रेस के इंजन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे ट्रेन लेट हो गई। यात्रियों की सुविधा के लिए शिमला की ओर जाने वाली हिमालयन क्वीन को शताब्दी के कालका स्टेशन पहुंचने के बाद ही रवाना किया गया।
-विनय अरोड़ा, स्टेशन प्रबंधक, कालका