हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित स्वां नदी में हो रहे अवैध खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी ने इस बात पर हैरानी जताई है कि जिला प्रशासन, पुलिस, खनन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, पर्यावरण विभाग, राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण आखिर कैसे पर्यावरण के नियमों के इस भीषण उल्लंघन को नहीं रोक पा रहे हैं।
एनजीटी ने निर्देश दिए हैं कि मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों अपने स्तर पर संबंधित विभागों के साथ ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन करें। अगली वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान दोनों अधिकारियों को एक्शन टेकन रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए भी कहा गया है। एनजीटी का कहना है कि आपराधिक के साथ यह एयर एक्ट, वॉटर एक्ट व पर्यावरण एक्ट का भी उल्लंघन है। अवैध खनन रोकने, खनन करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने, शामिल वाहनों को जब्त करने, उल्लंघन का आंकलन कर रिकवरी, लीज कैंसल करने और पर्यावरण को पहुंचे नुकसान को कम करने के लिए प्लान बनाने को कहा गया है।
15 दिन में रणनीति बनाने के निर्देश
एनजीटी ने अगले पंद्रह दिन के भीतर एक बैठक कर रणनीति तैयार कर काम शुरू करने का समय भी निर्धारित किया है। प्रदेश के अमनदीप ने एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार ने स्वां नदी के चैनलाइजेशन के लिए 922 करोड़ रुपये जारी किए हैं। चैनलाइजेशन के बहाने राजनीतिक संरक्षण में खनन लाइसेंस के नाम पर अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नदी के तट से बड़े पोकलैंड और जेसीबी मशीनों की मदद से बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। एनजीटी का कहना है कि राज्य पर्यावरण के संरक्षण के लिए ट्रस्टी हैं और उनका फर्ज है कि लोगों को साफ पर्यावरण दिलाए क्योंकि यह उनका सांविधानिक हक है।