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Shimla News: दृष्टिबाधित संघ ने सचिवालय से ओकओवर तक निकाली रोष रैली, सुनवाई नहीं होने पर सरकार पर फूटा गुस्सा

Tue, 07 Apr 2026 10:34 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

पिछले 902 दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे दृष्टिबाधित संघ ने राजधानी शिमला में सोमवार को एक बार फिर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। पढ़ें पूरी खबर...
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दृष्टिबाधित संघ के सदस्यों को ओक ओवर जाने से रोकते पुलिस कर्मी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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दृष्टिबाधित संघ ने सोमवार को सचिवालय से ओकओवर तक रोष रैली निकाली। राजधानी शिमला में बीते 902 दिनों से जारी आंदोलन के बाद भी मांगों की सुनवाई नहीं होने पर संघ का सरकार के खिलाफ गुस्सा फूटा। इस दौरान पुलिस के साथ भी प्रदर्शन करने वालों की हल्की नोकझोंक हुई। संघ के पदाधिकारियों ने नग्न होकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे सचिवालय से मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर तक मार्च निकालने की कोशिश के दौरान पुलिस ने दृष्टिबाधितों को रास्ते में ही रोक लिया।

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इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वह उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसमें नग्न प्रदर्शन भी शामिल होगा। दृष्टिबाधित संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें राजनीति का अंदाजा नहीं है। आज मुख्यमंत्री आसाम में है, वहां भी बिहार की तरह हालत होंगे। वह लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिबाधित कोटे के खाली पड़े बैकलॉग पदों को भरने की मांग कर रहे हैं।
 

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राजेश ठाकुर ने बताया कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संघ का आरोप है कि जब भी वे चक्का जाम या बड़ा प्रदर्शन करते हैं, तब उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जाता है, लेकिन बाद में उनकी मांगों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। सरकार ने उनकी सहारा पेंशन भी बंद कर दी। उन्होंने कहा कि बीते दिनों पेश किए बजट में भी दृष्टिबाधितों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया जबकि विभिन्न विभागों में उनके लिए आरक्षित पद वर्षों से खाली पड़े हैं। ऐसे में अब जबतक उनकी मांगे पूरी नहीं होती है तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
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