हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई सूचना देने में देरी करने पर डीएफओ ग्रामीण को कड़ी चेतावनी देते हुए शिकायतकर्ता को 3,000 रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह मुआवजा आरटीआई आवेदक डॉ. पवन कुमार बंटा को अपनी अपीलों की पैरवी करने और मानसिक प्रताड़ता देने के लिए कहा है। इसके लिए कारण यह बताया गया है कि सूचना अप्रमाणित है और इसे प्रथम अपीलीय अथॉरिटी के निर्देश के बाद जारी किया गया है।
मुआवजे के भुगतान का साक्ष्य भी आयोग को देने के आदेश जारी किए गए हैं। मुआवजे का भुगतान करने की अनुपालना रिपोर्ट को भी इस आदेश प्राप्ति के एक हफ्ते के अंदर देने को कहा गया है। आयोग के इस आदेश के अनुसार सभी पार्टियों को विस्तार से सुना गया। आयोग ने पाया कि प्रथम अपीलीय अथॉरिटी के निर्णय के बाद जनसूचना अधिकारी ने सारी सूचना उपलब्ध करवा दी है, जो आरटीआई एक्ट 2005 के तहत स्पष्ट किए गए समय से अधिक समय बीत जाने के बाद दी गई है। जनसूचना अधिकारी को चेतावनी दी जाती है कि भविष्य में आरटीआई के मामलों को देखते समय सतर्क रहें।