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Shimla News: नगर निगम शिमला के भवन ध्वस्तीकरण का आदेश रद्द

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जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला, सुनवाई का अवसर न देने पर अदालत सख्त,
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साल 2022 में कसुम्पटी में अनधिकृत निर्माण का मामला
नए सिरे से निर्णय के लिए मामला एमसी को वापस भेजा
दीपक मेहता
शिमला। अनधिकृत निर्माण के आरोप में फंसे कसुम्पटी निवासी जगदीश चंद को जिला एवं सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायाधीश प्रवीण गर्ग ने नगर निगम शिमला का भवन के ध्वस्तीकरण आदेश रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि निगम ने अपीलकर्ताओं को बिना उचित अवसर दिए जल्दबाजी में कार्रवाई की जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अपीलकर्ता ने 26 दिसंबर 2022 को नगर निगम आयुक्त के पारित फैसले को चुनौती दी थी। मामला हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 253 (2) के तहत दायर अपील से जुड़ा है। नगर निगम ने 26 दिसंबर 2022 को आदेश पारित कर अपीलकर्ता को कथित अनधिकृत भवन निर्माण एक माह के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। ऐसा न करने पर पानी और बिजली के कनेक्शन काटने का आदेश था।
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विवाद की शुरुआत 3 नवंबर 2022 को हुई जब एक शिकायत के आधार पर निगम के कनिष्ठ अभियंता ने कसुम्पटी स्थित तांता निवास का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया कि अपीलकर्ता ने स्वीकृत योजना से अधिक निर्माण किया था।
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निगम ने नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की। सुनवाई 3 दिसंबर को तय हुई जहां अपीलकर्ता के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। यह समय 24 और फिर 26 दिसंबर तक बढ़ाया गया लेकिन अंतिम दिन नए अधिवक्ताओं द्वारा मांगे दस्तावेजों की प्रतियां निगम ने देने से इनकार कर दीं और आदेश पारित कर दिया। उधर सत्र न्यायालय ने कहा कि नोटिस जारी होने के एक माह से भी कम समय में आदेश पारित करना अनुचित जल्दबाजी है। अदालत ने टिप्पणी की कि सुनवाई का अधिकार मात्र औपचारिकता नहीं, बल्कि कानून द्वारा प्रदत्त मौलिक अवसर है। अदालत ने 26 दिसंबर 2022 का आदेश रद्द कर मामला आयुक्त नगर निगम को पुन: विचार के लिए भेज दिया। आदेश में कहा गया है कि अपीलकर्ताओं को उत्तर दाखिल करने का एक और प्रभावी अवसर दिया जाए। मामला का नए सिरे से निर्णय लिया जाए। साथ ही दोनों पक्षों को 11 नवंबर 2025 को आयुक्त शिमला के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है। संवाद
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