वहीं जिला प्रशासन और पुलिस विभाग मामले को लेकर जल्द कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। पुलिस के मुताबिक इस तरह से समाज को बांटने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है। गौर हो कि संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण को गिराने की मांग को लेकर देवभूमि संघर्ष समिति के बैनर तले स्थानीय लोगों ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। इस दौरान उग्र प्रदर्शन भी हुए और पुलिस और लोग आमने-सामने भी आ गए। इस मामले में मुस्लिम समुदाय के नगर निगम आयुक्त कोर्ट में अवैध निर्माण को गिराने की अनुमति मांगने के बाद अवैध हिस्से को गिराने के आदेश जारी हुए थे। इसके बाद प्रतीत हो रहा था कि अब शहर में अवैध निर्माण से उपजा विवाद शांत हो जाएगा, लेकिन देवभूमि संघर्ष समिति के सनातन सब्जी वाला अभियान शुरू होने से पुलिस और प्रशासन की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है।
समिति के सह संयोजक विजय शर्मा ने बताया कि संजौली बाजार के बाद पूरे शहर और प्रदेश में यह अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अपने समाज के लोगों को ऊपर उठाने के लिए समिति ने शहरवासियों से भी अपील की है कि वह इनसे ही सामान खरीदें। उधर, इस बारे में उपायुक्त अनुपम कश्यप ने स्पष्ट कहा कि इस बारे में वह कुछ नहीं कह पाएंगे, एसपी शिमला ही इस बारे में बता पाएंगे। पुलिस अधीक्षक शिमला संजीव कुमार गांधी ने इस बारे में बात करने पर कहा कि समाज को इस तरह से बांटने का किसी को भी अधिकार नहीं है। इसको लेकर जल्द ही नगर निगम, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।
तहबाजारियों के लिए पहचानपत्र अभी अनिवार्य नहीं
उधर, प्रदेश सरकार की ओर से तहबाजारियों के लिए पहचानपत्र अभी अनिवार्य नहीं किए गए है। हालांकि, बीते दिनों विधानसभा की ओर से गठित स्ट्रीट वेंडर्स कमेटी की विधानसभा सचिवालय में हुई बैठक में पहचानपत्र अनिवार्य करने पर सहमति बनी थी। हालांकि, इस पर अभी कानूनी राय ली जा रही है। बैठक में शहरी विकास विभाग ने केंद्र सरकार की 2014 और हिमाचल प्रदेश सरकार की 2016 की स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी को लेकर बनाए गए नियम पर विस्तृत प्रस्तुति दी है। इसके अलावा कमेटी के सदस्यों ने भी अपने सुझाव दिए हैं। शहरी क्षेत्तों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में तहबाजारियों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। तहबाजारियों को बसाने के लिए अलग जोन बनाए जाने पर भी चर्चा हुई।