पीठ ने सरकार से जिम्मेदारी तय करने के लिए पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ जांच करने को भी कहा। पीठ ने कहा कि पीड़िता की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। उसकी निजता का भी ध्यान नहीं रखा गया। इसके चलते पीड़िता को मानसिक कष्ट पहुंचा।
सरकार पीड़िता को पांच लाख रुपये जुर्माना दे और बाद में उसे दोषी डॉक्टरों के वेतन से काटे। अदालत ने कहा कि शीर्ष अदालत की रोक के बाद यह टेस्ट किया गया जो पीड़िता के अधिकार का घोर उल्लंघन है। डॉक्टरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा परीक्षण करने वालों पर मुकदमा चलाया जाएगा।
डॉक्टरों को सख्त चेतावनी
हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा परीक्षण करने वालों पर मुकदमा चलाया जाएगा। अदालत ने अस्पताल की ओर से डिजाइन किए जांच के प्रोफॉर्मा को कानून की नजर में खराब माना और कहा कि यह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53ए की अनदेखी करता है। साथ ही यह यौन हिंसा के शिकार लोगों के साथ स्वास्थ्य पेशेवरों के व्यवहार को लेकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन है।