गुईला के जंगल में आग से जले चार कच्चे मकान
चुराह उपमंडल की पंचायत गुईला के जंगल में शरारती तत्वों की ओर से लगाई गई आग से मैलीकुड़ी धार (अधवारी) स्थित ग्रामीणों के चार कच्चे मकान राख हो गए। इतना ही नहीं, भयंकर आग से वन विभाग के चीड़ और देवदार के कई पेड़ों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। कच्चे मकान मालिकों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है, क्योंकि सर्दियों के दिनों में ग्रामीण अपने माल-मवेशियों के साथ निचले क्षेत्रों में चले जाते हैं। जंगलों को आग के हवाले करने वाले शरारती तत्वों पर नकेल कसने की ग्रामीणों ने आवाज बुलंद की है। डीएफओ सलूणी सुशील कुमार गुलेरिया ने बताया कि जंगल में लगी आग के कारण मिटटी-लकड़ी से बने मकान जले हैं। बताया कि शरारती तत्वों पर नकेल कसने के लिए ग्रामीणों को भी आगे आना चाहिए।
सूखे से दहक रहे जंगल, अब नेरवा के जंगल में भड़की आग
लगातार सूखे के कारण जंगल दहकने शुरू हो गए हैं। चौपाल व कुपवी उपमंडल में बीते चार माह से बर्फबारी और बारिश न होने से जमीन से नमी गायब हो गई है। अब किसानों और बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। वह कृषि और बागवानी से संबंधित कार्य नहीं कर पा रहे हैं। पूरे चौपाल विधानसभा क्षेत्र के जंगल जल रहे हैं। हवा में धुआं फैला हुआ है। जंगलों के निकटवर्ती गांवों में तो स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। लोगों को जंगलों में भड़की आग से अपने घर व बगीचे बचाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। चौपाल उपमंडल में कई स्थानों पर तो बगीचे आग की चपेट में आ भी चुके हैं। वन विभाग के कर्मचारी स्थानीय लोगों के सहयोग से आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। वन विभाग आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुका है। इसके बावजूद शरारती तत्वों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण विभाग की ओर से आज तक किसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं करना है। बीते दिन नेरवा कस्बे के निकटवर्ती जंगल में आग लग गई, जिसे रातभर की कड़ी मशक्कत के बाद बुझाया गया। चारों ओर धुआं फैल गया है। दृश्यता मात्र 50 मीटर तक रह गई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग पर समय रहते काबू न पाया जाता तो आग बस्ती तक पहुंच सकती थी। उन्होंने विभाग से आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।