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आरक्षण के मुद्दे पर भागवत के साथ आए शांता कुमार

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आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए सुझाव पर भाजपा ने तो किनारा कर लिया लेकिन वरिष्ठ नेता एवं कांगड़ा चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद शांता कुमार ने इसे गंभीरता से लिया है। शांता कुमार ने कहा है कि आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत की ओर से आरक्षण पर दिए सुझाव पर पूरे देश को गंभीरता से विचार करना होगा।
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शांता ने कहा कि मोहन भागवत के सुझाव पर विचार होना चाहिए। वे भी इस संबंध में चार सुझाव देंगे। उन्होंने कहा कि भागवत ने आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की बात नहीं की बल्कि इसकी समीक्षा करने की सलाह दी है ताकि आरक्षण का उद्देश्य पूरा हो सके। इस दृष्टि से तो आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट आंखें खोलने वाली है।
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शांता ने दिया रिपोर्ट का हवाला

एक रिपोर्ट के मुताबिक 60 करोड़ लोग केवल एक हजार रुपये महीने पर गुजारा कर रहे हैं। करीब 11 करोड़ लोग भुखमरी की हालत में हैं। अनुसूचित वर्गों में 83 प्रतिशत और जनजाति वर्ग में 87 प्रतिशत लोगों की मासिक आय केवल एक हजार रुपये से कम है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनुसूचित जाति वर्ग में केवल 4.6 प्रतिशत और जनजाति वर्ग में केवल 4.48 प्रतिशत परिवारों की आय 10 हजार से अधिक है।

इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि आजादी के 68 साल बाद भी सभी कल्याणकारी योजनाएं गरीबी को दूर नहीं कर सकीं। रिपोर्ट के मुताबिक केवल 5 प्रतिशत लोगों को ही आरक्षण का कुछ लाभ हुआ है। सवाल यह है कि इतना आरक्षण देने के बाद भी उसका लाभ कहां चला गया। साफ है कि इसका लाभ मलाईदार लोगों ने ही उठाया। एक ही परिवार के दो-तीन आईएएस अधिकारी बन गए फिर भी वे आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं।
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