जनजातीय जिला किन्नौर में सरकार और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही जिले के हजारों लोगों पर भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल रिकांगपिओ में सरकार ने वेंटिलेटर तो मुहैया करवाए, लेकिन एनेस्थीसिया विशेषज्ञ न होने से सात वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। हालत यह है कि आपात स्थिति में मरीजों को रिकांगपिओ से शिमला रेफर किया जा रहा है।
कोरोना महामारी से जूझ रहे मरीजों के लिए वेंटिलेटर संजीवनी का कार्य कर रहे हैं। लेकिन रिकांगपिओ क्षेत्रीय अस्पताल में संक्रमित मरीजों के उपचार की पुख्ता व्यवस्था आज भी नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि वेंटिलेटर महामारी के दौर में मरीजों के लिए जीवन रक्षक का काम करता है। लेकिन अफसोस है कि क्षेत्रीय चिकित्सालय रिकांगपिओ में बीते कई माह से वेंटिलेटर का उपयोग नहीं हो रहा है। अस्पताल में बीते कई माह से एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नहीं है।
सरकार ने बीते 6 अप्रैल को धर्मशाला से चिकित्सक का स्थानांतरण रिकांगपिओ के लिए था, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह ट्रांसफर अब रद्द कर दिया गया है। महामारी के दौर में संक्रमित मरीजों और बड़े ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर शिमला पहुंचना पड़ रहा है।
उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी किन्नौर डॉ. सोनम नेगी ने कहा कि सरकारी आदेश के अनुसार अस्पताल से 4 वेंटिलेटर जो प्रधानमंत्री केयर फंड से आए थे, उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा भेजा गया है। अस्पताल में 5 वेंटिलेटर काम कर रहे हैं।
कोविड मरीजों को मौत के मुंह में धकेल रही सरकार
किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार की नाकामी के कारण संजीवनी अस्पताल छोलतू कोविड केयर सेंटर नहीं बन पाया है। यहां 32 बेड के साथ ऑक्सीजन के अलावा हर सुविधा मौजूद हैं। सरकार जिले के कोविड मरीजों को मौत के मुंह में धकेल रही है। गंभीर हालत वाले मरीजों को शिमला रेफर किया जा रहा है और आधे रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देता है।