पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि वह दिल्ली में जरूर हैं, पर इसी मसले पर गए हैं, ऐसा नहीं है। वह निजी काम से हैं। उन्होंने फोटो बदलवा दिए हैं। यह इतना बड़ा मामला नहीं था।
कोविड काल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही होर्डिंग विवाद से शुरू हुई हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति गरमा गई है। पिछले चुनावों में सीएम पद के दावेदार रह चुके पूर्व मंत्री जीएस बाली अधिक सक्रिय हो गए हैं।
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बाली के दिल्ली जाने से यह हलचल और बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो वह हाईकमान के बडे़ नेताओं के संपर्क में हैं। मौजूदा घटनाक्रम को कांग्रेस में आगामी चुनाव के मद्देनजर नेतृत्व की जंग से जोड़ा जा रहा है।
मंगलवार को पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि वह दिल्ली में जरूर हैं, पर इसी मसले पर गए हैं, ऐसा नहीं है। वह निजी काम से हैं। उन्होंने फोटो बदलवा दिए हैं। यह इतना बड़ा मामला नहीं था। कुछ लोगों को उनके और वीरभद्र सिंह के कई दशकों के अच्छे संबंध रास नहीं आ रहे हैं। वही इसे मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने तो इसलिए पोस्टर लगवाए कि भाजपा भी लगा रही है तो वह भी लगवा देते हैं, इसमें सांसें हैं तो संसार है इस थीम को उठाया गया है।
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क्या यह यह मामला
पिछले दिनों प्रदेश भर में कांग्रेस पार्टी की ओर से होर्डिंग लगाए गए। इनमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर, पूर्व मंत्री जीएस बाली, शिमला शहरी कांग्रेस के अध्यक्ष यशवंत छाजटा आदि के फोटो लगाए गए, मगर इसमें छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह का फोटो नहीं था। इस पर बवाल खड़ा हो गया। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व मंत्री जीएस बाली के फोटो बहुत बड़े थे। अन्य राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं के छोटे फोटो लगाए गए।
इस पर शिमला और कांगड़ा में कांग्रेस के एक बडे़ खेमे के कार्यकर्ता भड़क उठे। उन्होंने पोस्टर फाड़ दिए। होर्डिंग में पूर्व मंत्री जीएस बाली के मुंह पर तो कालिख ही पोत डाली। अब पूर्व मंत्री जीएस बाली ने ही यू-टर्न लेते हुए दूसरे होर्डिंग भेजे हैं, जिनमें वीरभद्र सिंह का फोटो तो है, पर उनके अपने फोटो से छोटा है। अब देखना यह होगा कि दूसरे धडे़ की क्या प्रतिक्रिया होगी।