भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान और हिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग आयोजित संगोष्ठी में शिमला शहर के बदलते परिवेश पर मंथन किया गया। तर्क दिया गया कि शहर की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए अभी से कदम उठाने होंगे।
संगोष्ठी में ‘औपनिवेशिक विरासत सामंजस्य, शहरी सौंदर्यीकरण और आधुनिकता’ विषय पर मंथन होगा। मंगलवार को शिमला में शुरू हुई संगोष्ठी में शिमला में तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक, वास्तुकला आदि विषयों पर चर्चा हो रही है। शिमला प्रदेश का एक बड़े और महत्वपूर्ण शहर में तब्दील हुआ है।
संगोष्ठी की शुरुआत संस्थान के निदेशक प्रो. चेतन सिंह के स्वागत भाषण से हुई। हिमाचल सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव भाषा एवं संस्कृति उपमा चौधरी ने संगोष्ठी की विषयवस्तु से अवगत करवाया। आठ अक्तूबर तक चलने वाली इस संगोष्ठी में 18 विद्वान, प्रशासक एवं वास्तुकार भाग लेंगे।
इन प्रतिभागियों में विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से प्रो. लक्ष्मण सिंह ठाकुर, प्रो. नारायणी गुप्ता, प्रो. सुजाता पटेल, प्रो. भूपिंद्र सिंह मरह, डा. रवींद्र कुमार धीमान, सौम्या शर्मा, वेद सीगन, संजीवा पांडे, एसएन जोशी, वनित जिष्टू, आर्कि टेक्ट जैसमिन कौर, उपमहापौर टिकेंद्र पंवर और डा. जगवीर सिंह शामिल हैं।
संगोष्ठी के इस क्रम में भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से आठ अक्तूबर को शाम छह बजे गेयटी थियेटर में एक नाटक का मंचन किया जाएगा।