इससे पहली बार तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व एवं वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त मित्रा का नाम सामने आया था। उस समय भी मित्रा से पूछताछ की गई, लेकिन रिकार्डिंग के तथ्यों को नजरंदाज कर दिया गया। इसी वजह से उस समय मित्रा पहले गृह सचिव और बाद में वीरभद्र सरकार के दौरान मुख्य सचिव तक बन गए, लेकिन अब नई सरकार के
दौरान कोर्ट से क्लोजर रिपोर्ट खारिज होने के बाद ब्यूरो की नए सिरे से शुरू हुई जांच में वही पुराने तथ्य मित्रा की नई मुसीबत बन गए हैं। सूत्रों का कहना है कि ब्यूरो को अगर सरकार से मित्रा को बतौर आरोपी पूछताछ और अन्य कार्रवाई करने की मंजूरी मिली तो गिरफ्तारी तक के लिए भी ब्यूरो को मंजूरी नहीं लेनी होगी।