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पाइप कितने खरीदे यह महत्वपूर्ण नहीं, पानी कितना मिला- यह देखूंगा: अग्रवाल

Mon, 01 Oct 2018 11:58 AM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आखिर हिमाचल की अफसरशाही की कमान 1985 बैच के तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी बृज कुमार अग्रवाल को दे दी। अग्रवाल सोमवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव की कुर्सी संभाल लेंगे। रविवार को उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी होते ही अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रभारी सुरेश शांडिल्य ने उनसे विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश : 

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सवाल : आपकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा कहां हुई? 
जवाब : मैं यूपी के फर्रुखाबाद के फ तेहगढ़ का मूल निवासी हूं। मैं 15 जून 1961 को  वहीं जन्मा। शुरुआती पढ़ाई साधारण सरकारी स्कूलों में हुई। आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग, आईआईटी दिल्ली से एमटेक और इग्नू से एमबीए किया। लोक प्रशासन में पंजाब विश्वविद्यालय से एमफिल की। 
सवाल : आईएएस अधिकारी में कब बने? 
जवाब : मैं 1983 में आगरा में आयकर विभाग में सहायक आयुक्त नियुक्त हुआ। 1985 में आईएएस में हिमाचल काडर में चयन हुआ। शुरुआती पोस्टिंग दुर्गम क्षेत्र पच्छाद में सहायक आयुक्त की हुई। फिर जलोड़ी पास की वजह से तब सात-आठ महीने कटे रहने वाले आउटर सिराज आनी में सेवाएं दीं। केंद्र और राज्य मेें विभिन्न पदों पर रहा।   
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सवाल : क्या आपको आभास था कि आप ही मुख्य सचिव होंगे? 
जवाब : मुझे लगता था कि मेरी वरिष्ठता देखी जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुझ पर भरोसा जताया। इसका आभारी हूं। मेरा सौभाग्य है कि अब अलग रूप में सेवाएं दूंगा।
सवाल : क्या प्राथमिकताएं रहेंगी? 
जवाब : प्रयास रहेगा कि सरकारी महकमे वेल ऑइल्ड तरीके से काम करें। मुख्यमंत्री जो फैसले लेते हैं, कैबिनेट जो फैसले करती है, जनता से जुड़े जो फैसले हैं, उनका लाभ हो। हमारी सफलता बजट खर्च करने, स्कीम बनाने या चिट्ठियां लिखने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आम आदमी को क्या मिला, इसे सुनिश्चित करना होगा। 
सवाल : मगर ऐसा तो हर चीफ सेक्रेटरी कहते आए हैं? पाइपें कितनी खरीदीं ये महत्वपूर्ण नहीं, पानी कितना मिला इसकी मॉनिटरिंग करनी होगी। लोगों का क्या भला हुआ? हमें यह सुनिश्चित करना है। 
सवाल : आपकी चुनौतियां क्या हैं? 
जवाब : सबसे बड़ी चुनौती राज्य की आमदनी बढ़ाना है। हमारे पास अपने टैक्स पैदा करने का पोटेंशियल कम है। विकास की जरूरतें और लोगों की उम्मीदें ज्यादा हैं। हम इसमें संतुलन लाना चाहते हैं। एक अन्य चुनौती आपदा प्रबंधन की है। हमने हजारों लोगों हाल ही में आपदा से निकाला। हमें रिस्पोंस टाइम और कम करना है। 
सवाल : किस क्षेत्र में ज्यादा फोकस करेंगे?  
जवाब : पिछले दिनों फाइनेंस कमीशन आया, उससे ज्यादा से ज्यादा पैसा कैसे ला सकें , यह देखना है। केंद्रीय योजनाओं से धनराशि ज्यादा कैसे ला सकें, यह भी देखना है। बाहरी वित्तपोषित यानी विदेशों से वित्तपोषण के प्रोजेक्ट लाए जाने हैं। अभी भी ला रहे हैं। ये हमें सप्लीमेंट करते हैं। लोगों तक किसी चीज की कमी न हों। 
सवाल : आपने भू-सुधार पर कुछ रिसर्च भी किया है, यह क्या है?  
जवाब : मेरी रिपोर्ट किताब के रूप में छपने वाली है। स्टडी लीव पर रहकर छह देशों की प्रणालियों से भारतीय प्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन आईआईएम लखनऊ के साथ किया। यह छह देश आस्ट्रेलिया, जर्मनी, इंग्लैंड, यूके, फ्रांस, यूएसए और नीदरलैंड हैं। इसका राज्य को लाभ मिले, इसका प्रयास रहेगा।  
सवाल : भ्रष्टाचार पर कैसे कार्रवाई करेंगे? 
जवाब : भ्रष्टाचार सहन नहीं करेंगे। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, जो ऐसे मामलों में संलिप्त हैं। 
सवाल : आपके आदर्श कौन हैं? 
जवाब : मुझे मेरे अभिभावकों ने ईमानदार, विनम्र रहने और काम करने की सीख दी है। स्वर्गीय श्री कृष्ण मुरारी लाल और माता स्वर्गीय श्री सत्यवती अग्रवाल ने जो शिक्षा दी, उसी ने यहां तक पहुंचाया। धर्मपत्नी साधना अग्रवाल के सहयोग से तमाम मुश्किलों को चुटकियों में हल करता रहा। उनका मायका आगरा से है। बेटा अनिमेष अग्रवाल इंजीनियर हैं और बेटी सोनाक्षी अग्रवाल हैं। वह स्वयंसेवी संस्था के साथ काम करती हैं। 
सवाल : और कुछ कहेंगे
जवाब : सरकार जो है वह टीम वर्क है। इसमें पालिटिकल एग्जीक्यूटिव हैं और राजनीतिक लोग हैं, वे जो चीजें कर रहे हैं, उन्हें कैसे लागू करें। ब्यूरोक्रेसी में भी आईएएस, आईपीएस अधिकारी और इंजीनियर हैं, कर्मचारी हैं। सब मिलकर काम करें।

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काम करने वालों के अच्छे दिन, कन्नी काटने वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

1985 बैच के आईएएस अधिकारी बीके अग्रवाल के मुख्य सचिव बनने के बाद शासन से लेकर जिलों में बैठे अफसरों में बेचैनी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि उनके पदभार ग्रहण करने के बाद शासन से लेकर जिलों तक में बड़ा फेरबदल हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह व स्वास्थ्य रहते अग्रवाल ने काम में ढील बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई के इरादे जताए थे। पांच महीने में अग्रवाल की शैली में काफी हद तक यह संदेश धरातल तक पहुंचाया भी। अब उनके मुख्य सचिव पद पर आसीन होने से काम से कन्नी काटने वाले अफसरों में बेचैनी का आलम है।

दरअसल, शनिवार को सेवानिवृत्त हुए विनीत चौधरी मुख्य सचिव बनने से पहले से लंबे समय से हिमाचल में थे। ऐसे में राज्य में मौजूद अफसरों में उनकी गुड बुक और बैड बुक वाले अफसरों को उनके मुख्य सचिव बनने के बाद ओहदे मिलने में अंतर साफ झलकता था। चूंकि अग्रवाल लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे और पांच महीने पहले प्रदेश वापस लौटने के बाद भी वह अफसरों से ज्यादा सोशल नहीं हुए थे। ऐसे में माना जा रहा है कि वह काम के आधार पर ही अधिकारियों को तवज्जो देंगे। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह और स्वास्थ्य रहने के दौरान उन्होंने काम न करने वालों के खिलाफ जो सख्त रुख अपनाया, उससे प्रशासन में उनकी छवि को पारदर्शिता और सख्त मिजाज से जोड़कर देखा गया।

पांच महीने में लिए ये सख्त फैसले
पांच महीने के दौरान ही उन्होंने काम में गड़बड़ी करने पर चंबा मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया। कांग्रेस सरकार के दौरान हुई सिपाही भर्ती में गड़बड़ी के मामले में आरोपी डाक्टर और पुलिस अधिकारियों के इंक्रीमेंट रोकने के आदेश जारी कर दिए। वहीं, महिला पुलिस कर्मी से अश्लीलता मामले में डीएसपी को घर बैठाने जैसे कड़े कदम उठाकर उन्होंने अपनी इस सख्त प्रशासन वाली छवि को और मजबूत किया। 

धीमान, गुप्ता, ओंकार और मनोज को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
जानकारों की मानें तो विनीत चौधरी के कार्यकाल के दौरान तकरीबन हाशिये पर जा चुके प्रधान सचिव आरडी धीमान व संजय गुप्ता, ओंकार शर्मा और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से हाल में लौटे मनोज कुमार को नए निजाम में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव जेसी शर्मा व ओंकार शर्मा, मुख्य चुनाव अधिकारी पुष्पेंद्र राजपूत जैसे अधिकारियों के प्रभार भी बढ़ सकते हैं।
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