कुल्लू के रायसन में हिमाचल प्रदेश के एकमात्र छरमा प्रोसेसिंग प्लांट पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। एलपीएस की ओर से प्लांट को केंद्र सरकार की मदद से 1.50 करोड़ की लागत से अपग्रेड किया जाना है। जिसकी सभी प्रकार की प्रक्रिया पूरी हो गई है, लेकिन 30 साल की लीज खत्म होने से जिला प्रशासन ने एलपीएस को नोटिस देकर इसे खाली करने का कहा है। एशिया की दूसरी सबसे बड़ी संस्था एलपीएस (लाहौल पोटेटो सोसायटी) ने कुल्लू-मनाली के बीच पड़ने वाले रायसन में छरमा प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है।
अब इसे केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय की ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की मदद से यहां आधुनिक मशीनें लगाकर इसे अपग्रेड किया जना था। इसको लेकर केंद्र सरकार ने मंजूरी भी प्रदान कर दी है। अब लीज समाप्त होने के फेर में प्लांट का आधुनिकीकरण फंस गया है।
इससे ने केवल लाहौल-स्पीति जिले के हजारों छरमा किसानों की आर्थिकी को झटका लगेगा, बल्कि जिला कुल्लू के बागवानों को भी नुकसान होगा। एलपीएस के अध्यक्ष सुदर्शन जस्पा ने कहा कि प्लांट को केंद्र सरकार की मदद से 1.50 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बनाया जाना है। अपग्रेड होने से यहां छरमा के जूस बनाने की क्षमता अधिक होगी।
प्रधान ग्राम पंचायत नालडा सरोज कुमार, प्रधान जाहलमा पंचायत सुरेंद्र, जिप सदस्य छिमेद लामो, छरमा उत्पादक शेर सिंह ने कहा कि रायसन स्थित छरमा प्रोसेसिंग प्लांट को नहीं हटाया जाना चाहिए। इधर, एसडीएम कुल्लू डॉ. अमित गुलेरिया ने कहा कि साढ़े चार बीघा में लगे इस प्लांट को हटाने के लिए एलपीएस को नोटिस भेजा गया है। इसकी लीज अवधि खत्म हो गई है।
इम्युनिटी बढ़ाता है छरमा का जूस, कई देशों के सैनिक भी पीते हैं
कोरोना काल में छरमा का जूस इम्युनिट बढ़ाने में मददगार माना गया है। छरमा के जूस में विटामिन-सी की मात्रा होने से छरमा के जून को चीन समेत कई देशों के सैनिकों को इसे पिलाया जाता है। सीबकथॉर्न एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि छरमा का जूस और इसकी पत्तियां कोरोना में इम्युनिटी बूस्टर का काम करती है।