उपमंडल में अपग्रेड हो रही तहसीलों के हाल, एसडीएम के आते ही तहसीलदारों को समेटना पड़ता है आवासों से सामान
राजस्व अधिकारी महासंघ ने सरकार को भेजी शिकायत अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में तैनात कई तहसीलदारों के आवास एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने अपने अधीन कर लिए हैं। यही नहीं, कुछ अफसरों को तो दफ्तर तक खाली करने पड़े हैं। इससे एसडीएम और तहसीलदारों के बीच टकराव जैसी स्थिति भी पैदा हो रही है।
वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण एसडीएम के लिए तहसीलदारों को मजबूरन अपने सरकारी आवास छोड़ने पड़ रहे हैं। उपमंडल में अपग्रेड हो रही तहसीलों में ऐसे मामले सामने आने के बाद प्रदेश राजस्व अधिकारी महासंघ ने अब सरकार को भी इसकी शिकायत भेज दी है। जिला शिमला और सोलन के कई तहसीलदारों के सरकारी आवास और दफ्तर अब एसडीएम के पास चले गए हैं। तहसीलों में काम करने के लिए सरकार की ओर से तहसीलदारों या नायब तहसीलदारों को दफ्तर के साथ आवास मिलते हैं। इसमें जो तहसीलें अब उपमंडल में अपग्रेड हो रही हैं, वहां एसडीएम की तैनाती होते ही तहसीलदारों को अपना सामान समेटना पड़ रहा है। इस पर राजस्व अधिकारी एकजुट हो गए हैं। इनका कहना है कि उन्हें आवास सुविधा दी जाए या फिर इसके एवज में भत्ता जारी किया जाए।
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राजस्व अधिकारी महासंघ का कहना है कि जो आवास अभी तक तहसीलदारों को आवंटित किए थे, उनमें अब एसडीएम का कब्जा है। हाल ही में सोलन जिले के एक उपमंडल में आवास विवाद काफी बढ़ गया था। इसके बाद एसडीएम ने सरकारी आवास छोड़ दिया था। राजस्व कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष नारायण सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार को संघ ने अपना मांगपत्र भेजा है। जिला प्रशासन का कहना है कि इस मामले पर सरकार से ही फैसला होना है।
450 अधिकारियों में सिर्फ 24 के पास वाहन सुविधा
राजस्व, आपदा समेत कई अहम कार्यों को कर रहे तहसीलदारों के पास वाहन सुविधा तक नहीं है। प्रदेशभर में करीब 125 तहसीलदार और 225 नायब तहसीलदार तैनात हैं। इनमें से सिर्फ 24 को ही वाहन सुविधा मिली है। यह ज्यादातर किन्नौर, चंबा जिले के दूर दराज के इलाकों में तैनात तहसीलदारों को मिली हैं। शिमला में भी कुछेक अधिकारियों को इसकी सुविधा है। बाकी हो अपनी गाड़ी में आपदा, राजस्व आदि के कामों के लिए मौके पर पहुंचना पड़ रहा है। इसके लिए संघ ने ई-टैक्सी की सुविधा देने की मांग की है।