प्रदेश में स्क्रबटायफस से आए दिन मामले सामने आ रहे हैं। बुखार की चपेट में आए लोग अस्पताल में पहुंच रहे हैं। अब तक 90 से ज्यादा मरीजों में इस बीमारी के लक्ष्ण पाए गए हैं। पिछले साल भी 40 से ज्यादा लोगों ने इस बीमारी से जान गंवाई थी।
डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी घास और झाड़ियों में पनपने वाले एक खास तरह के पिस्सु के काटने से होती है। इससे शरीर पर पहले हल्के लाल दाने से उभर आते हैं। इसके बाद पीड़ित को तेज बुखार होने लगता है।
साथ ही पूरे शरीर में दर्द होने लगता है। इस पर आम दवा भी ज्यादा असर नहीं कर पाती। ऐसे में महज पांच सात दिन में ही मरीज की मौत भी हो जाती है।
ये सावधानियां बरतें
डॉक्टरों के अनुसार घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें। घास के बीच चलते वक्त जूतों का इस्तेमाल करें। हल्का बुखार होने पर डॉक्टरों से चैकअप करवाएं। टेस्ट करवाने के बाद नियमित दवाएं भी लें।
इस बीमारी का इलाज बेहद आसान हैं। मगर यदि इलाज समय पर शुरू नहीं होता है तो रोगी की जान भी जा सकती है। प्रदेश में अभी तक जितनी भी मौतें हुई हैं। उनमें ज्यादातर मरीज ग्रामीण इलाकों से सामने आए हैं।
ऐसे में ग्रामीण इलाकों के लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
नहीं थम रहा स्क्रब टायफस का प्रकोप
स्क्रब टायफस का प्रकोप थम नहीं रहा। आईजीएमसी अस्पताल में दो की मौत हो चुकी है जबकि मरीजों का आंकड़ा 90 से पार पहुंच चुका है। डाक्टरों का कहना है कि जिनकी मौत हुई है उन्हें बीमारी के अंतिम पड़ाव पर यहां लाया गया था।
उधर, सरकार ने स्क्रब टायफस के 650 रुपये के टेस्ट भी निशुल्क कर दिए हैं। मरीज सुबह टेस्ट करवाकर शाम चार बजे तक रिपोर्ट ले सकता है। डाक्टरों का कहना है कि लोग तेज बुखार को हल्के में न लें।
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि सभी संदिग्ध मरीजों के टेस्ट निशुल्क किए जा रहे हैं। दो मरीजों की मौत हो चुकी है। अस्पताल में स्क्रब टायफस के रोजाना औसत पांच से छह मरीज दाखिल किए जा रहे हैं।