प्रदेश के मिडल और हाई स्कूलों की खेल प्रतियोगिताएं कभी भी बंद हो सकती हैं। दो साल से शिक्षा विभाग प्रतियोगिताएं करवाने को फंड नहीं दे रहा है। इस समय अवधि तक शिक्षकों और स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (एसएमसी) ने अपनी ओर से राशि एकत्र कर प्रतियोगिताएं करवाईं।
कमेटियां पहले ही हाथ खींच चुकी हैं। अब शिक्षकों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रदेश शिक्षक महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी की छोटा शिमला स्कूल में हुई बैठक में यह बात सामने आई। राज्य महामंत्री रजनीश और प्रवक्ता डा. मामराज पुंडीर ने कहा कि वर्ष 2013 से सरकारी स्कूलों में खेल और परीक्षा करवाने को फंड बंद कर दिए हैं।
पुंडीर ने बताया कि विभाग या तो फंड दे या फिर प्रतियोगिताएं बंद करवा दे। अब शिक्षकों और एमएमसी ने फंड देने से इनकार कर दिया है। ये प्रतियोगिताएं ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर करवाई जाती हैं।
बैठक में 11 जिलों के प्रधान, महासचिव और प्रदेश कार्यकारिणी के 109 सदस्यों ने भाग लिया। सरकार से आग्रह किया कि विभाग में 4-9-14 के मामले पिछले दो साल से पेंडिंग पड़े हैं, उन्हें 31 अगस्त तक निपटाए।
सरकार ने नए खुले स्कूलों में टीजीटी और टीजीटी नॉन मेडिकल तथा एक पद शास्त्री का दिया है। निर्णय लिया कि सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में सिर्फ पांच पद देना, पिछले 11 साल से पैरा अध्यापकों को रेगुलर करना, अनुबंध अध्यापकों को 3 साल में रेगुलर करना आदि मांगों का मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।