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मौत की पगडंडियों से स्कूल का सफर

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सियासी मंचों से होने वाले विकास के दावों की हकीकत गिरिपार के भटरोग गांव की खतरनाक डगर को देखकर पता चल जाती है। इस रास्ते से हर रोज दर्जनों स्कूली बच्चे सतौन स्कूल पहुंचते हैं। रास्ता ऐसा है कि अगर जरा सा पांव फिसला तो सीधे गिरि नदी में जा गिरे।  यह क्षेत्र सिरमौर जिले का गिरिपार यानी गिरि नदी के पार वाला इलाका भटरोग है। इस गांव की आबादी करीब ढाई सौ के आसपास है।
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यहां पहुंचने के लिए पैदल मार्ग के एक तरफ  नीचे गिरि नदी का तेज बहाव है और ऊपर कठोर पहाड़ हैं। मुश्किल से आधा फुट संकरे रास्ते से स्कूली छात्रों और ग्रामीणों को पैदल ही चलना पड़ता है। जरा सी चूक मतलब सीधे गिरि नदी में गिरना है। भटरोग गांव सतौन बाजार से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है। ग्र्रामीणों के आने जाने का रास्ता यही है। भटरोग गांव के छोटे-छोटे बच्चे स्कूल में पढ़ने रोजाना सतौन आते हैं और जान जोखिम में डालकर पैदल चलने को मजबूर हैं।

लोक निर्माण विभाग ने सालवाला से भटरोग तक रोड बनाया है, लेकिन भटरोग से सतौन तक की सड़क का टेंडर अभी नहीं लग पाया। इस कारण ग्रामीणों को कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही। उधर, पोका पंचायत प्रधान सत्या चौहान ने बताया कि अभी पंचायत में शमशानघाट के रास्ते का कार्य किया जाएगा। इस दौरान इस मार्ग को भी चौड़ा किया जाएगा।
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नालायकी से सड़क बन गई पगडंडी

पोका पंचायत के लिए 1970 में सतौन-डाकपत्थर रोड बना था। यह भटरोग गांव को जोड़ता है। इस मार्ग पर अस्सी के दशक तक सरकारी बस भी चलती थी। लेकिन, बरसात के बाद साल दर साल सड़क क्षतिग्रस्त होती चली गई। अब हाल यह है कि सड़क पगडंडी में बदल गई है। इस पर पैदल चलाना भी खतरनाक साबित है।

टेंडर लगते ही शुरू करेंगे काम
‘इस मार्ग को अभी सालवाला से भटरोग तक ही बनाया है। भटरोग से सतौन तक के रोड का प्राक्कलन सरकार को भेज दिया है। टेंडर लगने के बाद ही इस रोड का कार्य किया जाएगा’
- अनिल गुप्ता, जेई लोक निर्माण विभाग
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