शिक्षा विभाग में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में अब आईटी और अकाउंट्स एक्सपर्ट की भी मदद ली जाएगी। फर्जी बैंक खाते और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले पोर्टल को खंगालने के लिए शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। आईआईटी मुंबई और रुड़की से पढ़े आईटी विशेषज्ञों को इस जांच में सहयोग करने के लिए बुलाया गया है।
शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया है कि फर्जी तरीके से बैंक खाते खोलने और पोर्टल में गड़बड़ियां किस प्रकार हुई हैं। इसकी जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में बैंकों से भी रिकार्ड तलब किया गया है।
शिक्षा सचिव ने साल 2015 और 2016 के दौरान छात्रवृत्ति आवंटन में हुई गड़बड़ियों को लेकर शुरू की गई जांच की रिपोर्टें भी एकत्र करना शुरू कर दिया है। उच्च शिक्षा निदेशालय के संयुक्त नियंत्रक वित्त से पुरानी जांच रिपोर्टें तलब की गई हैं।
साल 2015-16 के दौरान प्रदेश के कुछ संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति नहीं मिलने की शिकायतें की थीं। इन मामलों की जांच के दौरान कई संस्थानों पर जुर्माना भी हुआ था, लेकिन मामले की विस्तृत जांच नहीं होने के चलते गड़बड़ियां करने वाले कार्रवाई से बच गए थे।
अब शिक्षा सचिव ने दोबारा से पुराने मामलों की रिपोर्टें खोलने का फैसला लिया है। शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया है कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एक विद्यार्थी को दो-दो छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पैसा जारी कैसे किया गया?
निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी बैंक अकाउंट्स कैसे खोले? बैंक अधिकारियों की इसमें क्या भूमिका रही? इन बिंदुओं की जांच करने के लिए आईटी और अकाउंट्स विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।