मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तानाशाही से जनता सहित कांग्रेस के मंत्री व कार्यकर्ता भी दुखी हैं। यह बात बुधवार को प्रदेश भाजपाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने ऊना नगर परिषद के मुख्य बाजार में मतदाताओं से संपर्क के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि धोखा देना व बदले की राजनीति करना वीरभद्र सिंह की पुरानी आदत है। आज सांसदों द्वारा पीएम चुनने की प्रक्रिया की बात करने वाले वीरभद्र सिंह बताएं कि मुख्यमंत्री बनने के लिए कांग्रेस हाईकमान को आंखें क्यों उन्होंने दिखाई थी। उस समय तो नेता न बनाने पर कांग्रेस छोड़ने की धमकी वीरभद्र दे रहे थे, लेकिन आज सत्ता के नशे में मदहोश होकर वीरभद्र सिंह केवल एक जांच अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं।
सत्ती ने कहा कि प्रदेश में वीरभद्र सिंह ने विकास को रोकते हुए, विनाश की राजनीति शुरु की है। शैक्षणिक संस्थान हों या सरकारी कार्यालय सबका कांग्रेसीकरण किया जा रहा है। प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारियों को राजनीतिक विरोधियों के विरुद्व मामले दर्ज करने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
प्रदेश में विकास कार्य पटरी से उतर गए हैं। महज कागजी घोषणाओं की सरकार बनकर रह गई है। प्रदेश की जनता बेहाल है और सरकार की नई योजनाओं जिनमें कौशल विकास भत्ता प्रमुख है, में भी घोटाले की बू आने लगी है। राज्य में अनेक शिकायतें आ रही हैं कि कौशल विकास भत्ते की आड़ में युवाओं को लूटा जा रहा है।