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संयुक्त किसान मंच: आरपार की लड़ाई लडेंगे बागवान, 27 सितंबर को बंद का एलान

Sun, 19 Sep 2021 10:03 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि ठियोग में बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने किसान बागवानों को आश्वासन दिया था, लेकिन मंत्री ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। 
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संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसान-बागवानों के प्रति सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति और कॉरपोरेट कंपनियों की मनमानी के खिलाफ संयुक्त किसान मंच ने आंदोलन छेड़ने का एलान कर दिया है। किसान बागवानों के मुद्दों पर संयुक्त किसान मंच ने 27 सितंबर को बंद का आह्वान किया है। आंदोलन को लेकर समर्थन जुटाने के लिए पंचायत स्तर पर बैठकों का दौर शुरू कर दिया गया है। इसी कड़ी में रविवार को रामपुर के सराहन में बैठक हुई। 

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संयुक्त किसान मंच ने ठियोग, थानेधार, टापरी, निरमंड, रामपुर, आनी, कोटखाई, जुब्बल और रोहड़ू में बैठकों की तिथियां तय कर दी हैं। लोगों को लामबंद करने के लिए संयुक्त किसान मंच ने 32 सदस्यीय समिति गठित की है। समिति के सदस्य पंचायत और गांव स्तर पर बैठकों में भाग लेंगे। संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि किसान बागवानों को लेकर सरकार की भेदभाव पूर्ण नीति के खिलाफ किसान बागवान एक मंच पर इकट्ठे हो रहे हैं।

मंच को 22 से अधिक संगठनों का समर्थन मिल चुका है। 27 सितंबर को बंद के लिए किसान बागवान संगठनों के अलावा छात्र, मजदूर, महिला, व्यापारिक संगठनों, ट्रक, टैक्सी, बस ऑपरेटर यूनियनों से भी सहयोग मांगा जा रहा है। केंद्र व प्रदेश सरकार की किसान, मजदूर और आम जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि ठियोग में बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने किसान बागवानों को आश्वासन दिया था, लेकिन मंत्री ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। 
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आज ठियोग, 21 को कोटखाई, 22 को रोहड़ू में होगी बैठक
आज संयुक्त किसान मंच की बैठक ठियोग में होगी। 21 सितंबर को कोटखाई और 22 सितंबर को रोहड़ू सर्किट हाउस में बैठक होगी।

इन मांगों को लेकर आंदोलन पर उतरे बागवान संगठन
एमआईएस में ए,बी,सी ग्रेड सेब 60, 44 और 24 रुपये प्रतिकिलो खरीदा जाए। परदे में सेब की बोली बंद कर खुली बोली की व्यवस्था हो। बागवानों से मनमानी काट बंद हो। आढ़तियों और लदानियों के पास बकाया पैसे का तुरंत भुगतान हो। जिस दिन माल बिके उसी दिन भुगतान हो, सेब की पैकेजिंग को इस्तेमाल होने वाले कार्टन और ट्रे की बढ़ी कीमतें वापिस हों, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए, बढ़ती महंगाई और मालभाड़े की बढ़ी दरें वापिस हों, मंडियों में वजन के हिसाब से सेब सहित अन्य फसलें बेचने की व्यवस्था हो। 

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