प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जयराम सरकार ने तत्कालीन डीजीपी सोमेश गोयल को हटाकर सीताराम मरडी को डीजीपी बनाया था। डीजीपी रहने के दौरान मरडी ने पुलिस कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई फैसले लिए। इनमें एचएएसआई बनाने से लेकर सिपाहियों को जांच का दायित्व देने, हर जिले में केंद्रीय पुलिस सब कैंटीन खोलने जैसे निर्णय लिए।
आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए सामान खोने की शिकायत व्हाट्सऐप नंबर पर करने, पुलिस चौकी पर एफआईआर, लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए आगंतुक सर्वेक्षण जैसी योजनाएं शुरू कीं। कोरोना के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक सही जानकारी व लोगों का मार्गदर्शन करने का भी प्रयास किया।