ऑनलाइन ही ली जाती थी नशे की सामग्री की डिमांड
गुर्गों से बातचीत के लिए डिजिटल नंबर करता था इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पुलिस के हत्थे चढ़े अंतरराज्यीय चिट्टा तस्कर गिरोह का सरगना संदीप शाह चिट्टा तस्करी के लिए डार्क वेब और सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था।
पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर संदीप शाह नशे का पूरा नेटवर्क ऑनलाइन चलाता था। वह कोलकाता में बैठकर दिल्ली से इस पूरे नेटवर्क को सालों से चला रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि उसके खातों में हर हफ्ते 8 से 10 लाख रुपये का लेनदेन होता था। यह पिछले चार सालों से नशे का यह काला कारोबार चला रहा है। इतने कम समय में लाखों का लेनदेन होने से पुलिस का आकलन है कि यह पिछले कुछ सालों में 25 से 30 करोड़ रुपये के नशे का अवैध कारोबार कर चुका है। पुलिस ने आरोपी से कई आधुनिक उपकरण भी बरामद किए हैं। यह इतना शातिर है कि अपने साथियों से बातचीत करने के लिए डिजिटल नंबर का इस्तेमाल करता था जिससे उसकी लोकेशन का आसानी से पता न लगाया जा सके। इसके अलावा वह लगातार अपने मोबाइल नंबर भी बदलता रहता था। पुलिस ने इसके साथियों और गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ हुई ऑनलाइन चेट से जुड़े कई साक्ष्य बरामद किए हैं। इसके अलावा क्यूआर कोड के जरिये संदीप शाह और नीरज के बैंक खातों में हुई सैकड़ों पेमेंट के रिकॉर्ड भी मिले हैं। कुछ समय की मिली बैंक ट्रांजेक्शन में ही एक करोड़ से अधिक का लेनदेन सामने आया है।
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कई लोकेशन के वीडियो मिले, जहां की थी सप्लाई
पुलिस की जांच में मोबाइल फोन और अन्य डिवाइस की जांच के दौरान पुलिस को कई वीडियो भी मिले हैं, जहां पर नशा छिपाकर रखा था। यह ऐसी जगहें होती थीं जहां पर पत्थर के नीचे, पैरापिट और सड़कों के किनारे नशा छिपाकर रखा जाता था। यहां की वीडियो बनाने के बाद व्हाट्सएप पर भेजी जाती थी। इसके बाद खरीदार यहां से नशा लेकर चला जाता था।
नशा तस्करी का अंतरराज्यीय नेटवर्क चलाने वाले सरगना संदीप शाह को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया जब वह कोलकाता के एख जिम में कसरत कर रहा था। पुलिस का दावा है कि वह खुद चिट्टे का नशा नहीं लेता है, लेकिन चिट्टे के इस अवैध कारोबार से हजारों युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो चुकी है।