दवाओं के सैंपल फेल होने का मुख्य कारण कंपनी की ओर से नियमों का पालन नहीं करना है। दवाओं का उचित भंडारण न होना भी एक कारण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में 22, 2021-22 में 20 और 2022-23 में 32 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं।
तीन सालों के भीतर हिमाचल प्रदेश में फार्मास्यूटिकल कंपनियों के 74 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। हिमाचल में 660 फार्मास्यूटिकल कंपनियां दवाइयां बनाती हैं। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने यह जानकारी भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दवाइयों की गुणवत्ता व प्रमाणिकता को औषधि प्रसाधन अधिनियम 1940 और नियमावली 1945 में निर्धारित मानकों के अनुसार परखा जाता है। दवाओं के नमूनों की जांच कंडाघाट और आरडीटीएल चंडीगढ़ और केंद्रीय दवा परीक्षण प्रयोगशाला कोलकाता में की जाती है। दवाओं के सैंपल फेल होने का मुख्य कारण कंपनी की ओर से नियमों का पालन नहीं करना है। दवाओं का उचित भंडारण न होना भी एक कारण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में 22, 2021-22 में 20 और 2022-23 में 32 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं।
फार्मासिस्ट के 572 मामलों का अभी नहीं हुआ पंजीकरण
हिमाचल प्रदेश में फार्मासिस्ट के 572 मामलों का पंजीकरण नहीं हुआ है। यह मामले लंबित हैं। इसके अलावा 15 मामलों को अस्वीकार किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह जानकारी भाजपा विधायक जनक राज की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट के पंजीकरण के लिए अलग से फार्मेसी काउंसिल गठित की गई है। फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों का पंजीकरण पैरा मेडिकल काउंसिल में नहीं होता है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग में भी 41 मामले अस्वीकार हुए हैं। इसी तरह पैरामेडिकल स्टाफ के 46 और लैब टेक्निशियन के भी 52 मामले अस्वीकार हुए हैं। इसका कारण मान्यता प्राप्त से शिक्षण संस्थानों से कोर्स नहीं किया जाना है।