भवनों की छतें रंगने के बाद अपना शिमला शहर पहले से भी खूबसूरत नजर आएगा। अभी आधे शहर की छतों पर रंग नहीं किया गया है। कई छतों पर काफी साल पहले रंग हुआ है, ऐसे में यह रंग फीका पड़ गया है।
मुख्य शहर की छतों की हालत तो जर्जर हो गई है। माल रोड, लोअर बाजार, गंज बाजार, सब्जी मंडी, राम बाजार और ओल्ड बस स्टैंड के पास स्थित कई भवनों की छतों पर तो जंग तक लग गया है।
ऐसे में हाईकोर्ट के आदेशों पर शुरू हुई नगर निगम की कार्रवाई ऐतिहासिक शहर की सुंदरता पर लग रहे दाग को हटाने के लिए सराहनीय कदम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने त्रिशा शर्मा बनाम राज्य सरकार के केस नंबर 956/2003 की सुनवाई करते हुए छतों को लाल या हरे रंग से रंगने के आदेश दिए थे। नगर निगम के बिल्डिंग बॉयलाज 1998 में भी इसका उल्लेख है।
साल 2006 के दौरान हाईकोर्ट के आदेशों के चलते समूचे शहर में छतों को रंगने की मुहिम शुरू हुई थी। बीते सालों के दौरान इस ओर नगर निगम द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।
अब एकाएक निगम को दोबारा हाईकोर्ट के आदेशों की याद आई है। इसके चलते नगर निगम ने शहरवासियों को हिदायत जारी कर दी है।