वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के प्रधान निजी सचिव रहे आरएस गुप्ता ने राज्य सरकार के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) चंडीगढ़ में याचिका दायर की है।
रिटायरमेंट के बाद देय लाभ रोके जाने पर उन्होंने मुख्य सचिव और प्रधान सचिव कार्मिक को भी प्रतिवादी बनाया है। गुप्ता सरकारी सेवा से 28 फरवरी को रिटायर हुए थे।
लेकिन, सरकार ने प्रोविजनल पेंशन देने और ग्रेच्युटी रोकने के आदेश पारित कर दिए। इसके लिए आधार बनाया गया कि जब तक एचपीसीए पर चल रहे केस की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सेवानिवृत्ति लाभ रोके जाएं।
आरएस गुप्ता इससे पहले कांगड़ा के डीसी भी थे, लेकिन इस केस में उनके खिलाफ रिकवरी जैसा कोई मामला नहीं बनता। विजिलेंस की चार्जशीट में भी उन्हें मुख्य आरोपियों में शामिल नहीं किया गया है।
इसी आधार पर आरएस गुप्ता ने अपने सेवानिवृत्ति लाभ की अदायगी ब्याज सहित करवाने और इसकी भरपाई जिम्मेदार अफसरों से करवाने के लिए कैट में केस दिया है।
उन्होंने इसमें सीवीसी के दिशा निर्देशों का भी हवाला दिया है। हालांकि, इसके बाद सरकार ने पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के सेवानिवृत्ति लाभ भी रोक दिए हैं। इसके लिए वीरभद्र सिंह टेबल बगिंग मामले की एक चार्जशीट को आधार बनाया गया है।