संख्या अधिक होने से एमबीआई भी वाहन चालक की ड्राइविंग पर पूरा ध्यान नहीं दे पाता। कई बार ऐसे चालक को लाइसेंस जारी हो जाता है, जो इसके काबिल नहीं होता। ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट में अपात्र चालकों की छंटनी हो जाएगी।
आरटीए की बैठक में कई अन्य मामलों पर भी निदेशक ने बस ऑपरेटरों के साथ चर्चा की। इस दौरान जहां नए रूटों को सेक्शन किया गया, वहीं संशोधित होने वाले रूटों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
परिवहन विभाग के निदेशक ने बताया कि अब विभाग बिना वजह रूट जारी नहीं करेगा। पहले रूट पर मिलने वाली सवारियों, रूटों की संख्या आदि पर विचार करने के बाद ही परमिट दिए जाएंगे।
कम सवारियों पर रूटों पर छोटी बसों को तवज्जो दी जाएगी। ये बसें बाद में बड़ी बसों के साथ तालमेल बैठाकर सवारियों को शिफ्ट करेंगी। इन रूटों को बेरोजगार युवाओं को जारी किया जाएगा।