भूस्खलन का खतरा बरकरार, डंगे के निर्माण को लेकर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। समरहिल चौक-बालूगंज सड़क पर शुक्रवार को मलबा गिरने की घटना के बाद बंद किया गया मुख्य मार्ग रविवार शाम को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। सड़क खुलने के बावजूद क्षेत्र में खतरा पूरी तरह टला नहीं है और स्थानीय लोगों व छात्रों में अब भी डर का माहौल बना हुआ है। वार्ड पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि क्षतिग्रस्त रिटेनिंग वॉल की मरम्मत का कार्य सोमवार से शुरू किया जाएगा और इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि शिव बावड़ी हादसे के बाद करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से इस रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया गया था जो पिछले वर्ष दिसंबर में ही पूरा हुआ था। लेकिन दीवार के कमजोर पड़ने और मलबा गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि जिस डंगे पर यह निर्माण किया गया है वह भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्र है और यहां पहले भी बार-बार भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं। ऐसे में इस तरह के अस्थिर ढलान पर भारी निर्माण करना ही जोखिम भरा फैसला साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि निर्माण में दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई जिसके कारण अब यह स्थिति सामने आई है।
रविवार शाम को मार्ग खुलने के बाद भी आम लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के हजारों छात्र रोजाना इसी मार्ग से आवाजाही करते हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। खासकर यूजी परीक्षाओं के दौरान छात्रों को समय से पहले घर से निकलना पड़ रहा है। कई छात्रों ने बताया कि वे मानसिक दबाव में परीक्षा देने पहुंच रहे हैं, क्योंकि रास्ते में किसी भी समय मलबा गिर सकता है। स्थानीय निवासियों ने भी आवाजाही में लगातार आ रही दिक्कतों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बारिश के बाद ढलान से पत्थर और मलबा गिरने लगता है जिससे सड़क पर चलना जोखिम भरा हो जाता है। कई लोगों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाना शुरू कर दिया है, जो लंबा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल मरम्मत कार्य तक सीमित न रहकर इस पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह मार्ग हजारों लोगों के लिए खतरे का कारण बना रहेगा।