प्रदेश में सरकारी नौकरी का एक कड़वा सच यह भी है। रिटायरमेंट के बाद न तो पेंशन मिली और न ही कोई फंड मिला। वर्ष 1988 से लगभग 27 साल सरकारी नौकरी में तैनात रहा और रिटायरमेंट पर पेंशन तक नसीब नहीं हुई।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थाचू राम आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी शोली में तैनात था। रेगुलर हुए दो साल ही हुए थे कि 31 मार्च, 2015 को रिटायर हो गया।
रिटायरमेंट के बाद थाचू राम को पेंशन नहीं लगी और न ही उसके पास पूंजी जमा हो पाई। यह दर्द उसके चेहरे पर साफ झलक रहा है।