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27 साल नौकरी करने के बाद भी इनके हाथ खाली

Wed, 01 Apr 2015 01:37 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश में सरकारी नौकरी का एक कड़वा सच यह भी है। रिटायरमेंट के बाद न तो पेंशन मिली और न ही कोई फंड मिला। वर्ष 1988 से लगभग 27 साल सरकारी नौकरी में तैनात रहा और रिटायरमेंट पर पेंशन तक नसीब नहीं हुई।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थाचू राम आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी शोली में तैनात था। रेगुलर हुए दो साल ही हुए थे कि 31 मार्च, 2015 को रिटायर हो गया।

रिटायरमेंट के बाद थाचू राम को पेंशन नहीं लगी और न ही उसके पास पूंजी जमा हो पाई। यह दर्द उसके चेहरे पर साफ झलक रहा है।
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सरकारी नौकरी के नाम सिर्फ श्रमदान ही किया

थाचू राम ने वर्ष 1988 में आयुर्वेदिक विभाग में बतौर पार्ट टाइम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनाती पाई थी। इस दौरान इसे कुल 165 रुपये वेतन मिलता था। इसके बाद वर्ष 2009 में थाचू राम डेली कर्मचारी बना और वेतन 4500 रुपये वेतन मिला।

वर्ष 2013 में यह चतुर्थ कर्मचारी रेगुलर हुआ और वेतन मिला 12000 रुपये। जब थाचू राम रेगुलर हुआ था, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था और आज जब वह रिटायर हुआ तो उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं।

थाचू राम कहता है कि उसने सरकारी नौकरी के नाम सिर्फ श्रमदान ही किया है। थाचू राम की तरह ही मोहन लाल भी ऐसी ही सरकारी नौकरी करने वाला है। यह भी वर्ष 2014 में रेगुलर हुआ था। इसे भी न तो जमा पूंजी मिल पाई और न ही पेंशन लगी है।
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